नकली भारतीय मुद्रा से जुड़े एक मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की पड़ताल झारखंड के हजारीबाग तक पहुंच गई है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर में सामने आए मामले से हजारीबाग के संदिग्ध संपर्कों या ठिकानों का क्या संबंध है। बुधवार को हजारीबाग के दो ठिकानों पर तलाशी ली गई थी।
एनआईए की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस मामले की शुरुआत मदनपुर में 2 लाख 48 हजार 500 रुपये मूल्य के कथित नकली भारतीय नोट मिलने के बाद हुई। मदनपुर थाने में 15 अगस्त 2026 को मामला दर्ज किया गया था। इसमें सुरेंद्र कुमार, विजय यादव, रंजन और प्रदीप साव उर्फ प्रदीप कुमार साव को आरोपी बनाया गया था।
शुरुआती पुलिस जांच के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआईए ने 18 अक्टूबर 2026 को मामले की जांच अपने हाथ में ली। एजेंसी ने इसे आरसी-02/2026/एनआईए/पीएटी के रूप में दर्ज किया है। अब जांच का केंद्र नकली नोटों के स्रोत, उन्हें बाजार में पहुंचाने की कथित व्यवस्था और उससे जुड़े संभावित सहयोगियों की पहचान पर है।
जांच का दायरा बिहार के साथ झारखंड और पश्चिम बंगाल तक फैल गया है। चार नवंबर को तीनों राज्यों में आठ ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया, जिनमें हजारीबाग के दो स्थान शामिल थे। एजेंसी इन ठिकानों से जुड़े संपर्कों और मदनपुर में दर्ज प्रकरण के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही है।
तलाशी के दौरान डिजिटल उपकरण, कथित रूप से आपत्तिजनक दस्तावेज और बांग्लादेशी मुद्रा मिलने की जानकारी दी गई है। बांग्लादेशी मुद्रा की बरामदगी के संदर्भ में भी जांच जारी है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पुष्टि नहीं की गई है, इसलिए इसके स्वरूप और संभावित संबंधों पर एजेंसी की जांच का निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
फिलहाल एनआईए यह जानने में जुटी है कि बरामद नकली नोट कहां से आए और बिहार, झारखंड तथा पश्चिम बंगाल में जिन संपर्कों की जांच की जा रही है, उनकी भूमिका क्या थी। हजारीबाग में हुई तलाशी इसी व्यापक जांच का हिस्सा है। मामले में आगे की स्थिति जांच एजेंसी के निष्कर्षों के बाद स्पष्ट होगी।