पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी कॉलेज में सोमवार को आपदा प्रबंधन पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। चाईबासा जिला प्रशासन के निर्देश पर हुए इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अलग-अलग आपात परिस्थितियों में सुरक्षित रहने और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने के व्यावहारिक तरीके बताए गए।
कार्यक्रम में कमांडर कवि रंजन ने बाढ़, भूकंप, सड़क दुर्घटना और सर्पदंश जैसी स्थितियों में अपनाए जाने वाले बचाव उपायों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को संकट के दौरान घबराने के बजाय सूझबूझ और तत्परता से काम करने पर जोर दिया।
प्रशिक्षण के दौरान हृदयाघात की स्थिति में सीपीआर देने की प्रक्रिया भी समझाई गई। विद्यार्थियों को वयस्कों के साथ नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को सीपीआर देने के तरीकों की जानकारी दी गई। इसके बाद उनसे सीपीआर का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया।
मॉक ड्रिल में उपलब्ध संसाधनों की मदद से अस्थायी स्ट्रेचर तैयार करने का तरीका प्रदर्शित किया गया। छात्र-छात्राओं ने घायल व्यक्ति को स्ट्रेचर पर सुरक्षित रखने और उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का अभ्यास किया। दुर्घटना या भूकंप के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने के वैकल्पिक उपायों पर भी जानकारी साझा की गई।
कॉलेज के प्राचार्य मनोजित विश्वास ने कहा कि आपदा किसी भी समय और किसी भी रूप में सामने आ सकती है। उनके अनुसार जागरूकता, सतर्कता और सही समय पर उठाया गया कदम लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को व्यावहारिक रूप से समझने को कहा, ताकि आपात स्थिति में वे स्वयं सुरक्षित रहते हुए दूसरों की सहायता कर सकें।
अधिकारियों ने बताया कि नियमित अभ्यास से आपदा के समय जान-माल की क्षति कम करने और प्रभावित लोगों तक समय पर मदद पहुंचाने में सहायता मिल सकती है। कार्यक्रम में कांस्टेबल राजीव कुमार सहित प्रशिक्षण दल, कॉलेज के सहायक प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।