लोहरदगा के 15 शिक्षकों के स्थानांतरण पर उपायुक्त करेंगे फैसला, हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने लोहरदगा के 15 शिक्षकों की याचिका को संयुक्त अभ्यावेदन मानते हुए उपायुक्त को कानून और लागू नियमों के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

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लोहरदगा के 15 सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण मामले पर झारखंड हाईकोर्ट का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने लोहरदगा के 15 सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़े मामले में जिले के उपायुक्त को उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने शिक्षकों की ओर से दाखिल याचिका को संयुक्त अभ्यावेदन के रूप में स्वीकार करते हुए उस पर कानून और लागू नियमों के अनुसार विचार करने को कहा है।

मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में हुई। विवाद जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा 27 जुलाई 2023 को जारी उस पत्र से जुड़ा है, जिसमें इन शिक्षकों को अलग-अलग विद्यालयों में अतिरिक्त बताते हुए दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया था। शिक्षकों ने इस आदेश को रद्द करने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान शिक्षकों की ओर से बताया गया कि स्थानांतरण आदेश जारी हुए करीब तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन उसे अब तक लागू नहीं किया गया। याचिका में सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया में निजी व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका को भी चुनौती दी गई थी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि उपायुक्त के स्तर से संयुक्त अभ्यावेदन पर फैसला होने तक वर्ष 2023 का स्थानांतरण आदेश लागू नहीं किया जाएगा, बशर्ते वह अभी तक प्रभावी न हुआ हो। इस व्यवस्था से संबंधित शिक्षकों की आपत्तियों पर प्रशासनिक स्तर पर नियमसम्मत विचार का रास्ता खुला है।

शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और सिद्धार्थ रंजन ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि आदेश के अब तक लागू नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को याचिका को अभ्यावेदन मानकर निर्णय लेने का निर्देश दिया जा सकता है।

राज्य सरकार की ओर से भी कहा गया कि शिक्षक संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। अब लोहरदगा के उपायुक्त को शिक्षकों की आपत्तियों, लागू स्थानांतरण नियमों और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण कर उचित फैसला करना होगा। अदालत के निर्देश में निर्णय के लिए किसी निश्चित नतीजे का उल्लेख नहीं किया गया है।