रामगढ़ जिले के पतरातू डैम की सुरक्षा और रखरखाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की पांच सदस्यीय टीम ने डैम का निरीक्षण किया था। टीम ने स्पिलवे में दरार, बांध पर उगे बड़े पेड़ों और जल निकासी के विद्युत गेट संचालन के ठप होने पर चिंता जताई।
पतरातू डैम में जलस्तर नियंत्रित करने के लिए आठ फाटक बनाए गए हैं। इनके संचालन के लिए मैनुअल और विद्युत, दोनों व्यवस्थाएं उपलब्ध थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि रखरखाव के अभाव में विद्युत प्रणाली काम नहीं कर रही है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर फाटकों के संचालन का दायित्व मैनुअल व्यवस्था पर रह सकता है।
लगभग तीन किलोमीटर लंबा बांध मिट्टी से बना है। निरीक्षण से जुड़ी जानकारी में बांध पर घनी झाड़ियों और बड़े पेड़ों के उगने का उल्लेख किया गया है। स्पिलवे की दरार को भी रखरखाव से जुड़ा अहम विषय बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले बांध की नियमित सफाई हर वर्ष कराई जाती थी।
करीब 2,727 एकड़ में फैले इस जलाशय का निर्माण 1960 के दशक में शुरू हुआ था और यह 1971 में तैयार हुआ। इसका मूल उद्देश्य पतरातू थर्मल पावर स्टेशन, पीटीपीएस कॉलोनी, सीसीएल की विभिन्न परियोजनाओं और रामगढ़ छावनी क्षेत्र के लिए पानी उपलब्ध कराना था। जलाशय में मुख्य रूप से नलकारी और सिमरा नदियों से पानी आता है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, निर्माण के समय डैम की अधिकतम जल भंडारण क्षमता 1332.05 आरएल निर्धारित थी। लगभग छह दशक पुराना होने के कारण इसकी क्षमता घटाकर 1327.05 आरएल किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। जलाशय में लंबे समय से गाद जमा होने और तकनीकी व्यवस्थाओं के रखरखाव पर सवाल उठते रहे हैं।
वर्ष 2017 में पर्यटन विकास के उद्देश्य से डैम को झारखंड पर्यटन विकास निगम को हस्तांतरित किया गया था। इसके बाद यहां पैदल पथ और पर्यटकों के बैठने के लिए कंक्रीट की बेंच बनाई गईं। अब यह जलाशय जलापूर्ति के साथ पतरातू लेक रिजॉर्ट और स्थानीय पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है। निरीक्षण में सामने आए बिंदुओं के बाद इसकी सफाई, संरचनात्मक देखरेख और गेट संचालन व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत रेखांकित हुई है।