परविंदर सिंह पूर्वी सिंहभूम शहरी कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त, ग्रामीण इकाई का भी अतिरिक्त प्रभार

प्रदेश कांग्रेस की अधिसूचना के अनुसार परविंदर सिंह को पूर्वी सिंहभूम शहरी जिला कमेटी की कमान मिली है। अगले आदेश तक वह ग्रामीण इकाई का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।

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जमशेदपुर में कांग्रेस नेता परविंदर सिंह की फाइल तस्वीर

जमशेदपुर में कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए परविंदर सिंह को पूर्वी सिंहभूम शहरी जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्हें अगले आदेश तक जिले की ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह नियुक्ति अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुमोदन के बाद की गई। अधिसूचना प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू के निर्देश पर जारी हुई है। इसी आदेश के तहत संतोष सिंह को धनबाद शहरी कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया और उन्हें धनबाद ग्रामीण इकाई की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई।

पूर्वी सिंहभूम में छह विधानसभा क्षेत्र और 18 प्रखंड हैं। जिले के व्यापक संगठनात्मक क्षेत्र को देखते हुए स्थानीय नेताओं की ओर से इसे शहरी और ग्रामीण इकाइयों में बांटने की मांग की जा रही थी। प्रदेश कांग्रेस ने 15 अक्टूबर को जिले को इन दो संगठनात्मक हिस्सों में विभाजित करने का निर्णय लिया था।

नई व्यवस्था में शहरी प्रभाग के दायरे में जमशेदपुर और उससे जुड़े औद्योगिक इलाके रखे गए हैं। इनमें जेएनएसी क्षेत्र, मानगो नगर निगम, जुगसलाई नगर परिषद, साकची, बिष्टुपुर, टेल्को, गोलमुरी, बिरसानगर तथा कदमा-सोनारी शामिल हैं। जुगसलाई और पोटका की 55 पंचायतों से बनी जमशेदपुर ग्रामीण ब्लॉक कमेटी भी इसी प्रभाग का हिस्सा होगी।

ग्रामीण संगठन के अंतर्गत घाटशिला, बहरागोड़ा, धालभूमगढ़, चाकुलिया, गुड़ाबांदा, डुमरिया, मुसाबनी, पोटका, पटमदा और बोड़ाम प्रखंड रखे गए हैं। परविंदर सिंह के पास फिलहाल दोनों इकाइयों की जिम्मेदारी होने से इन क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों के समन्वय का दायित्व भी उनके पास रहेगा।

परविंदर सिंह इससे पहले प्रदेश महासचिव, प्रदेश ट्रेनिंग सेल के अध्यक्ष और विभिन्न जिलों के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उनकी नई नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पूर्वी सिंहभूम में कांग्रेस की शहरी और ग्रामीण कमेटियां नए विभाजन के बाद अस्तित्व में आई हैं।