पलामू जिले के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को अब इलाज की दरें सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होंगी। स्वास्थ्य विभाग ने संस्थानों से रेट चार्ट लगाने के साथ उपलब्ध दवाओं की कीमत भी लोगों के सामने रखने को कहा है। पहले चरण में डॉक्टरों को नोटिस जारी कर निर्धारित नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हाल में उठे सवालों के बीच विभाग ने यह पहल की है। इलाज में कथित लापरवाही के कुछ मामलों में निजी क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। इसके बाद विभाग ने नेशनल मेडिकल काउंसिल के नियमों को लागू कराने के लिए सख्त रुख अपनाया है।
पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, कोई डॉक्टर अपना प्रचार नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि विज्ञापन जारी करने वालों की तस्वीरें जीपीएस लोकेशन के साथ मांगी गई हैं। विभाग बड़े होर्डिंग लगाकर प्रचार करने या भ्रामक विज्ञापन जारी करने वाले डॉक्टरों की पहचान कर रहा है।
ऐसे प्रचार से संबंधित एक रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है, जिसे नेशनल मेडिकल काउंसिल को भेजा जाएगा। विभागीय प्रक्रिया के तहत होर्डिंग और विज्ञापन से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। आगे की कार्रवाई इस रिपोर्ट और लागू नियमों के आधार पर किए जाने की तैयारी है।
सिविल सर्जन ने बताया कि निजी अस्पतालों को अपना रेट चार्ट बोर्ड पर प्रदर्शित करना है। दवाओं की कीमतों को भी सार्वजनिक करना होगा, जिससे मरीज और उनके परिजन उपचार तथा दवा पर आने वाले खर्च की जानकारी पहले से प्राप्त कर सकें।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मेदिनीनगर में 30 से अधिक निजी अस्पताल संचालित हैं, जबकि पूरे पलामू जिले में निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की संख्या करीब 200 है। निर्देश का दायरा जिले के इन संस्थानों तक रहेगा। विभाग अब नोटिस के बाद नियमों के अनुपालन और विज्ञापन संबंधी मामलों की रिपोर्ट तैयार कर रहा है।