पलामू के सरकारी स्कूलों में कम उपस्थिति पर ‘परवाज’ शुरू, सर्वे में मौसमी पलायन बड़ी चुनौती

जिला प्रशासन के सर्वे में सरकारी स्कूलों के कई विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति कम मिली है। बच्चों को दोबारा कक्षाओं से जोड़ने के लिए ‘परवाज’ कार्यक्रम शुरू किया गया है।

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पलामू के सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए शुरू परवाज कार्यक्रम

पलामू के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘परवाज’ कार्यक्रम शुरू किया है। प्रशासन के विशेष सर्वे में पहली से आठवीं कक्षा तक करीब 25 प्रतिशत और नौवीं से बारहवीं तक लगभग 30 प्रतिशत बच्चों के नियमित रूप से स्कूल नहीं आने की बात सामने आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अधिक बताई गई है।

जिले में करीब 2,665 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें 5,01,489 बच्चे पढ़ते हैं। सर्वे के दौरान विद्यालयों की आधारभूत संरचना के साथ विद्यार्थियों की उपस्थिति का भी आकलन किया गया। इसमें कुछ बच्चों के लगातार 20 से 30 दिनों तक कक्षाओं से अनुपस्थित रहने की जानकारी मिली। आठवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की अनुपस्थिति को विशेष चिंता का विषय माना गया है।

सर्वे में मौसमी पलायन को बच्चों के स्कूल से दूर होने की प्रमुख वजहों में गिना गया है। पलामू के कई परिवार धान की रोपाई और कटाई के समय दो से तीन महीने के लिए दूसरे राज्यों में चले जाते हैं। परिवार के साथ जाने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होती है। इसके अलावा कुछ परिवारों में बच्चों से खेती या दूसरे काम कराने जैसी परिस्थितियां भी सामने आई हैं।

‘परवाज’ के तहत जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी हर सप्ताह प्रखंडों का दौरा करेंगे। वे उन विद्यालयों में शिविर लगाएंगे, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी नियमित कक्षाओं से दूर हैं। अधिकारी अभिभावकों और ग्रामीणों से बातचीत करेंगे तथा बच्चों की लगातार उपस्थिति सुनिश्चित करने के उपायों पर काम करेंगे। कार्यक्रम में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की निगरानी और उसे बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

अभियान की निगरानी उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत कर रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों से शपथपत्र भी लिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि परिवारों की कामकाजी जरूरतों और पलायन जैसी व्यावहारिक चुनौतियों को समझते हुए बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का रास्ता निकालना होगा।

जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप कुमार के अनुसार, कम नियमित उपस्थिति और स्कूल छोड़ देना अलग-अलग स्थितियां हैं। अभियान में ऐसे विद्यार्थियों पर भी ध्यान दिया जाएगा जो कुछ दिन स्कूल आते हैं और फिर कई दिन अनुपस्थित रहते हैं। शिक्षकों को बच्चों को विद्यालय से जोड़े रखने की जिम्मेदारी दी गई है और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी लिया जा रहा है।