पलामू टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में एक नए वयस्क बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। रिजर्व प्रबंधन ने इसके बाद पलामू, गढ़वा और लातेहार के सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर निगरानी बढ़ा दी है। बाघ की गतिविधियों वाले कॉरिडोर में कैमरे लगाए गए हैं और अतिरिक्त वनकर्मियों को भी तैनात किया गया है।
रिजर्व के अधिकारियों ने पंजों के निशान और शिकार की घटनाओं के आधार पर नए बाघ की पहचान की है। हालांकि, टी-07 के रूप में चिह्नित इस बाघ की तस्वीर अभी कैमरे में दर्ज नहीं हुई है। वन विभाग अब उसकी गतिविधियों और आने-जाने के रास्तों की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहा है।
पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने नए बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है। उनके अनुसार, बाघ की लगातार निगरानी की जा रही है। जिस क्षेत्र में उसका मूवमेंट दर्ज किया गया, वहां कैमरे लगाने के साथ वनकर्मियों की संख्या भी बढ़ाई गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, बाघ वयस्क है और क्षेत्र में मवेशियों का शिकार कर रहा है। इसी कारण सीमावर्ती वन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कैमरों से तस्वीर मिलने के बाद उसके मूवमेंट और पहचान से जुड़ी अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड में बाघों के लिए एकमात्र संरक्षित क्षेत्र है। इसका वन्यजीव कॉरिडोर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के जंगलों से जुड़ा है। रिजर्व प्रबंधन के अनुसार, मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व की ओर से भी बाघ इस इलाके में प्रवेश करते रहे हैं।
वर्ष 2018 की गणना के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या शून्य बताई थी। इसके बाद 2020 में एक मृत बाघिन मिली और 2021 से अलग-अलग समय पर जीवित बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई। सितंबर 2026 में मिले ताजा संकेतों को रिजर्व क्षेत्र में सातवें नए बाघ की मौजूदगी के रूप में देखा जा रहा है, जबकि उसकी तस्वीर दर्ज करने के प्रयास जारी हैं।