पलामू के मेदिनीनगर में भीख मांगते मिले दो बच्चों की मेडिकल जांच पूरी हो गई है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार दोनों बच्चों का कोई अंग गायब नहीं है। बोर्ड ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दी। पेट पर चीरे के निशान मिलने के बाद बच्चों के किसी अंग के गायब होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई।
सीडब्ल्यूसी ने दोनों बच्चों को दो दिन पहले मेदिनीनगर के कोयल नदी क्षेत्र से रेस्क्यू किया था। बच्चों के पेट पर एक ही जगह चीरे जैसे निशान दिखाई देने के कारण उनकी स्वास्थ्य जांच कराने का निर्णय लिया गया। इसके लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया था, ताकि स्थिति का चिकित्सकीय आकलन हो सके।
पलामू सीडब्ल्यूसी के चेयरपर्सन शैलेंद्र चतुर्वेदी के मुताबिक समिति को मेडिकल रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट में दोनों बच्चों के सभी अंग सुरक्षित होने की बात दर्ज है। उन्होंने बताया कि अब दोबारा मेडिकल जांच कराने की आवश्यकता नहीं है। इस रिपोर्ट के साथ बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर उठी गंभीर आशंका का निवारण हो गया है।
रेस्क्यू के समय बच्चों ने अपना संबंध उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से बताया था। बाद में उनके माता-पिता सीडब्ल्यूसी के पास पहुंचे और पहचान से जुड़े दस्तावेज जमा किए। परिजनों ने अपना पता बिहार के गया जिले का बताया है। समिति उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर बच्चों को परिवार तक पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
सीडब्ल्यूसी की योजना दोनों बच्चों को गया की बाल कल्याण समिति के माध्यम से परिजनों को सौंपने की है। इससे पहले संबंधित समिति के स्तर पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। बच्चों को सीधे भेजने के बजाय संस्थागत प्रक्रिया अपनाई जा रही है, ताकि उनके परिजनों और पते का समुचित सत्यापन हो सके।
समिति ने बच्चों को केवल परिवार से मिलाने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखने की बात कही है। उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और स्कूल में नामांकन कराने की तैयारी भी की जाएगी। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद अब प्रक्रिया का ध्यान बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा और सुरक्षित पारिवारिक देखभाल पर केंद्रित रहेगा।