पलामू जिले के थानों में लंबित मामलों का अनुसंधान तेज करने के लिए इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के 120 पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी जिले के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों की जांच करेंगे। पुलिस ने अनुसंधान और विधि-व्यवस्था के लिए अलग-अलग विंग तैयार की हैं, ताकि दोनों कामों पर केंद्रित तरीके से कार्रवाई हो सके।
पुलिस के मुताबिक, जिले के अलग-अलग थानों में करीब दो हजार मामलों का अनुसंधान लंबित है। दिसंबर तक इनकी संख्या घटाकर लगभग एक हजार करने का लक्ष्य तय किया गया है। लंबित मामलों में चार सौ से अधिक मुकदमे वर्ष 2025 से पहले के हैं। इन पुराने मामलों का अनुसंधान भी दिसंबर तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
अनुसंधान के लिए चुने गए अधिकारियों की गुरुवार को पलामू के टाउन हॉल में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जांच से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा करने के साथ अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का आयोजन पलामू के पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी की पहल पर किया गया था।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य केवल लंबित मामलों की संख्या कम करना नहीं है। जांच को इस तरह पूरा करने पर जोर दिया गया है कि अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा जा सके और दोषी पाए जाने वाले अभियुक्तों को सजा दिलाने की प्रक्रिया मजबूत हो। नए कानूनों के तहत दर्ज मामलों का अनुसंधान भी जल्द पूरा करने को कहा गया है।
निर्धारित अवधि में अनुसंधान पूरा नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की बात भी कही गई है। जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक लंबित मामलों की प्रगति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं।
कार्यशाला में एएसपी दिव्यांश शुक्ला, बिश्रामपुर के एसडीपीओ चिरंजीवी मंडल और लेस्लीगंज के एसडीपीओ प्रशांत कुमार सहित कई पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। प्रशिक्षण और नियमित समीक्षा के जरिए पुलिस ने पुराने मामलों के निपटारे तथा मौजूदा मुकदमों की समयबद्ध जांच पर एक साथ ध्यान केंद्रित करने की योजना बनाई है।