पलामू रेंज के कई थानों में सामान्य पुलिसिंग से जुड़े रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। हाल के निरीक्षणों में सिरिस्ता के काम, लंबित मामलों के अनुसंधान और फरार आरोपियों से संबंधित अभिलेखों में कमियां मिली हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अधूरे रिकॉर्ड के कारण अपराधियों और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।
पलामू, गढ़वा और लातेहार में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार थानों का निरीक्षण कर रहे हैं। अगस्त 2026 में लातेहार के बरवाडीह थाने की जांच के दौरान पाया गया था कि मुठभेड़ में मारे गए, गिरफ्तार हो चुके या आत्मसमर्पण कर चुके कुछ नक्सलियों के नाम भी फरारी सूची में दर्ज थे। इसके बाद अभिलेख सुधारने और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने का निर्देश दिया गया।
पलामू के हैदरनगर थाने से जुड़े एक मामले में पुलिस ने घटना के दो दिन बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन आरोपपत्र तय समय में दाखिल नहीं हो सका। बाद में मुकदमों की समीक्षा के दौरान यह स्थिति सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपपत्र कई महीने बाद दाखिल किया गया।
डीआईजी किशोर कौशल ने 29 अक्टूबर को सतबरवा थाने का निरीक्षण किया था। वहां सिरिस्ता के कई रिकॉर्ड 2024 के बाद से अपडेट नहीं मिले। वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचे कुछ आवेदनों पर न तो कार्रवाई दर्ज थी और न ही जांच पूरी होने का उल्लेख मिला। इन कमियों को सामान्य पुलिसिंग के लिए गंभीर माना गया है।
पलामू में करीब दो हजार मुकदमों का अनुसंधान लंबित बताया गया है और दिसंबर तक इसे घटाकर एक हजार करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें लगभग 400 मुकदमे 2025 से पहले के हैं। जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, गढ़वा में करीब 1,200 और लातेहार में लगभग 1,100 मामलों का अनुसंधान लंबित था।
रेंज स्तर से सभी पुलिस अधीक्षकों को रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट कराने का निर्देश दिया गया है। सिरिस्ता का काम नहीं जानने वाले अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की बात भी कही गई है। डीआईजी ने स्पष्ट किया है कि फरार आरोपियों का सत्यापन नहीं करने और अभिलेखों में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।