झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू से जुड़े एक मोटर दुर्घटना दावा मामले में मृतक के परिजनों के लिए तय मुआवजा 9.38 लाख रुपये से बढ़ाकर 18.80 लाख रुपये कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक की अदालत ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए मृतक की मां किरण कपूर की क्रॉस ऑब्जेक्शन याचिका स्वीकार कर ली।
अदालत ने बीमा कंपनी को बढ़ी हुई राशि आठ सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया है। यह मामला 26 जून 2010 को महाराष्ट्र के पुणे जिले में हुई दुर्घटना से जुड़ा है। मुलशी स्थित नॉर्थ प्वाइंट चेक पोस्ट के पास ढलान पर खड़ा पानी का टैंकर लुढ़क गया था और उसकी चपेट में आने से शिव शंकर कपूर की मौत हो गई थी।
दुर्घटना के बाद पलामू के डालटनगंज स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन किया गया था। बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में कहा कि आपराधिक मामले में अंतिम रिपोर्ट दाखिल होने के कारण चालक की लापरवाही सिद्ध नहीं मानी जा सकती और कंपनी पर भुगतान का दायित्व नहीं डाला जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत के अनुसार, मोटर दुर्घटना दावा मामलों में न्यायाधिकरण उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से लापरवाही का निर्धारण करता है। पुलिस की अंतिम रिपोर्ट मात्र से किसी पक्ष को अपने आप दोषमुक्त नहीं माना जा सकता।
फैसले में प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाणपत्र और मोटर वाहन निरीक्षक की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया। अदालत ने माना कि ये साक्ष्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और दावा अधिकरण का चालक की लापरवाही संबंधी निष्कर्ष उचित था।
मुआवजे की गणना में मृतक की वार्षिक आय 1.52 लाख रुपये रखी गई। अदालत ने 28 वर्षीय स्वरोजगार करने वाले ठेकेदार की आय में भविष्य की संभावनाओं के लिए 40 प्रतिशत जोड़ा और 17 का गुणक लागू किया। अंतिम संस्कार, संपत्ति की हानि और मां को मिलने वाले फिलियल कंसोर्टियम की रकम जोड़ने के बाद कुल क्षतिपूर्ति 18.80 लाख रुपये तय हुई।