पश्चिमी सिंहभूम जिले के बड़ाजामदा ओपी क्षेत्र की टंकुरा बस्ती के बुरमा टोली में बुधवार सुबह जंगल से सटे एक खेत में मादा हाथी का शव मिला। उसकी मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। जांच और पशु चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद ही कारण का पता चलने की बात कही गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार शाम करीब 20 हाथियों का झुंड बस्ती में पहुंचा था। आबादी के पास हाथियों की मौजूदगी से गांव में भय का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी और टीम के मौके पर पहुंचने की उम्मीद की।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद सहायता के लिए वन विभाग की टीम नहीं पहुंची। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं मशाल और अन्य पारंपरिक तरीकों से हाथियों को घरों से दूर रखने का प्रयास किया। झुंड की आवाजाही के कारण लोग पूरी रात जागते रहे।
बुधवार सुबह बुरमा टोली के पास खेत में हाथी का शव होने की जानकारी फैली। इसके बाद ग्रामीण मौके पर जुटे। मौत की वजह को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हुईं, लेकिन अभी किसी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बड़ाजामदा और आसपास के गांवों में पिछले कई महीनों से हाथियों के झुंडों की आवाजाही होने की बात ग्रामीणों ने कही है। उनके मुताबिक, हाथी कभी खेतों में पहुंचते हैं तो कभी मुख्य सड़कों पर आ जाते हैं। इससे फसलों के नुकसान के साथ ग्रामीणों, राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
ग्रामीणों ने मादा हाथी की मौत की निष्पक्ष जांच कराने और हाथियों के आबादी वाले क्षेत्र में आने की सूचना पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नियमित निगरानी और समय पर कार्रवाई से ग्रामीणों तथा वन्यजीवों—दोनों की सुरक्षा बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सकती है।