रामगढ़ में बीते वर्षों के दौरान सड़क और रेल परिवहन का ढांचा तेजी से बदला है। कभी पुराने एनएच-33 और सीमित यात्री रेल सेवाओं पर निर्भर रहे जिले से अब रांची तक की यात्रा करीब एक घंटे में पूरी होने का दावा किया गया है। फोरलेन और सिक्सलेन सड़कों के साथ नए रेल संपर्क ने आवागमन के विकल्प बढ़ाए हैं।
झारखंड गठन के समय रामगढ़ हजारीबाग जिले का अनुमंडल था। उस दौर में रांची-पटना रोड के नाम से पहचाना जाने वाला पुराना एनएच-33 परिवहन का प्रमुख आधार था। दो लेन वाली इस सड़क पर भारी वाहनों के दबाव के कारण जाम लगता था। बरसात में पतरातू, गोला और दुलमी के कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क भी प्रभावित होता था।
सड़क नेटवर्क में बड़ा बदलाव 2015 के दौरान हजारीबाग-रांची फोरलेन, रामगढ़-कुजू बाईपास और बरकाकाना-भुरकुंडा-सायल रोड के निर्माण के बाद आया। पुराना एनएच-33 अब एनएच-20 के रूप में फोरलेन और सिक्सलेन मार्ग में परिवर्तित हो रहा है। ओरमांझी-गोला-जैनामोड़ भारतमाला एक्सप्रेसवे का निर्माण भी जारी है।
रेल संपर्क में टाटीसिलवे-सांकी नई लाइन और बरकाकाना-रांची नई रेल लाइन को महत्वपूर्ण विस्तार माना गया है। टाटीसिलवे-सांकी लाइन 2019 में शुरू हुई थी। इन परियोजनाओं से रामगढ़ का राजधानी रांची से सीधा रेल संपर्क बना और बरकाकाना से नियमित यात्री सेवाओं के विकल्प बढ़े।
बरकाकाना जंक्शन पहले मुख्य रूप से कोयला ढुलाई के लिए जाना जाता था, जबकि यात्री ट्रेनों की उपलब्धता सीमित थी। अब बरकाकाना से रांची के लिए पैसेंजर ट्रेनें और हटिया-सांकी सेवाएं चल रही हैं। हालांकि, बरकाकाना होकर राजधानी एक्सप्रेस का परिचालन दोबारा शुरू करने की मांग स्थानीय स्तर पर बनी हुई है।
जिले में बस, ई-रिक्शा और सीएनजी ऑटो की उपलब्धता भी बढ़ी है। रामगढ़ बस स्टैंड से रांची, हजारीबाग, बोकारो और जमशेदपुर के लिए बस सेवाएं मिल रही हैं। सड़क तथा रेल परियोजनाओं के विस्तार ने जिला मुख्यालय, ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास के बड़े शहरों के बीच यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सुगम बनाया है।