पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा और कोल्हान वन क्षेत्रों में स्थित 14 वनग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने की प्रशासनिक प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस पहल के तहत चिह्नित गांवों से संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध अभिलेखों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
चाईबासा स्थित जिला समाहरणालय के उपायुक्त प्रकोष्ठ में इस विषय पर बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता उपायुक्त मनीष कुमार ने की। बैठक में सारंडा के वन प्रमंडल पदाधिकारी अभिरूप सिन्हा, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, अपर उपायुक्त किस्टो कुमार बेसरा तथा संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी शामिल हुए।
अधिकारियों ने उपलब्ध मानचित्रों, वनग्राम अधिसूचना से जुड़े दस्तावेजों, प्लॉटिंग रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक अभिलेखों की समीक्षा की। बैठक में इन दस्तावेजों के आधार पर गांवों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने पर विशेष जोर दिया गया।
राजस्व ग्राम में परिवर्तन के लिए सारंडा वन क्षेत्र के 10 वनग्राम चिह्नित किए गए हैं। इनमें थोलकोवाद, तिरिलपोसी, नवागांव-1, नवागांव-2, बिटकल सोय, दीघा, बलिवा, करमपदा, बनगांव और कुमुदी शामिल हैं।
कोल्हान वन क्षेत्र से चार गांव इस प्रक्रिया में शामिल किए गए हैं। इनके नाम तुम्बाहाका, राजाबासा, रंगामाटी और हुसुपी हैं। इस तरह दोनों वन क्षेत्रों के कुल 14 वनग्रामों से जुड़े रिकॉर्ड प्रशासनिक समीक्षा के दायरे में हैं।
बैठक में किसी गांव के परिवर्तन को अंतिम मंजूरी दिए जाने या इसकी निश्चित समयसीमा की जानकारी नहीं दी गई। फिलहाल जिला प्रशासन का ध्यान संबंधित अभिलेखों की समीक्षा और वास्तविक स्थिति के आकलन पर है, ताकि आगे की आवश्यक प्रक्रिया दस्तावेजी आधार पर बढ़ाई जा सके।