पलामू जिले में एचआईवी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संक्रमित लोगों के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव को कम करने के उद्देश्य से बुधवार को दो महीने का सघन अभियान शुरू किया गया। मेदिनीनगर स्थित एमआरएमसीएच परिसर के गोलघर से जागरूकता रैली रवाना कर अभियान की शुरुआत की गई।
रैली को सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. एसके रवि और एआरटी मेडिकल ऑफिसर डॉ. मनीष कुमार ने हरी झंडी दिखाई। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अभियान सतत विकास लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए चलाया जा रहा है और इसका प्रमुख उद्देश्य एचआईवी के बारे में सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ बैठने, भोजन करने या हाथ मिलाने से संक्रमण नहीं फैलता। उन्होंने लोगों से संक्रमित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव नहीं करने की अपील की। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी ने बताया कि समय पर जांच और नियमित उपचार मिलने पर संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकते हैं।
अभियान के दौरान सुरक्षित व्यवहार, कंडोम के नियमित उपयोग और चिकित्सकीय परामर्श के महत्व की जानकारी भी दी जाएगी। आईसीटीसी काउंसलर चंदन प्रभाकर के मुताबिक, संबंधित केंद्रों पर एचआईवी जांच निःशुल्क उपलब्ध है और जांच कराने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती है। भेदभाव की स्थिति में एआरटी सेंटर या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क किया जा सकता है।
झारखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति के निर्देश पर संचालित इस अभियान में पलामू के 293 चिह्नित गांव शामिल किए गए हैं। इन गांवों में सहिया दीदी घर-घर जाकर परिवारों को एचआईवी संक्रमण, जांच, उपचार और बचाव से जुड़ी जानकारी देंगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं और परामर्श केंद्रों तक लोगों की पहुंच बढ़ाने का प्रयास होगा।
अभियान को गांवों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग माध्यम अपनाए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जबकि हाट-बाजारों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ नाटक और फ्लैश मॉब किए जाएंगे। ग्राम सभाओं के माध्यम से भी संक्रमण से बचाव और संक्रमित लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार का संदेश दिया जाएगा।