पश्चिमी सिंहभूम में एक जून से 31 अगस्त के बीच मानसून की बारिश सामान्य स्तर से काफी अधिक रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में तीन महीनों के दौरान 1,224.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जिले की सामान्य बारिश 807.3 मिलीमीटर मानी गई है। इस आधार पर यहां सामान्य से 52 प्रतिशत अधिक पानी बरसा, जो झारखंड के सभी जिलों में सबसे ज्यादा है।
कोल्हान के अन्य दोनों जिलों में भी इस अवधि की बारिश सामान्य से ऊपर रही। सरायकेला-खरसावां में 909.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि वहां का सामान्य स्तर 790.8 मिलीमीटर है। इस तरह जिले में 15 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। पूर्वी सिंहभूम में 916.9 मिलीमीटर पानी बरसा, जो 858.1 मिलीमीटर की सामान्य बारिश से सात प्रतिशत ज्यादा है।
राजधानी रांची में भी जून से अगस्त के बीच सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। जिले में तीन महीनों के दौरान 882.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 815.4 मिलीमीटर है। अंतर के लिहाज से रांची में बारिश आठ प्रतिशत अधिक रही। राज्य के आठ जिलों में इस अवधि के दौरान सामान्य से ज्यादा वर्षा हुई। पश्चिमी सिंहभूम के बाद लातेहार में 24 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।
इसके उलट झारखंड के 11 जिले बारिश की कमी वाली श्रेणी में रहे। पाकुड़ में स्थिति सबसे अलग रही, जहां 428.6 मिलीमीटर बारिश हुई। यह जिले की 901.6 मिलीमीटर सामान्य बारिश से 52 प्रतिशत कम है। देवघर और कोडरमा में सामान्य से 41-41 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई।
अन्य कम बारिश वाले जिलों में गढ़वा में 39 प्रतिशत, चतरा में 37 प्रतिशत और गिरिडीह में 35 प्रतिशत की कमी रही। हजारीबाग में सामान्य से 29 प्रतिशत कम पानी बरसा। बोकारो और साहिबगंज में 23-23 प्रतिशत तथा गुमला में 22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
तीन महीनों के आंकड़े राज्य के भीतर मानसून के असमान वितरण को दिखाते हैं। एक ओर पश्चिमी सिंहभूम सामान्य स्तर से डेढ़ गुना से अधिक बारिश के साथ सबसे आगे रहा, वहीं पाकुड़ में सामान्य मात्रा की तुलना में लगभग आधी बारिश ही दर्ज हुई। पूरे झारखंड में इस अवधि के दौरान कुल 747.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जो राज्य की सामान्य बारिश से कम रही।