पश्चिमी सिंहभूम में स्कूल और अस्पताल तक पहुंच पथ को प्राथमिकता देने का निर्देश

चाईबासा में निर्माण योजनाओं की समीक्षा के दौरान उपायुक्त मनीष कुमार ने सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने तथा जांच के बाद ही भुगतान करने का निर्देश दिया।

2 मिनट पढ़ें 5 बार पढ़ी गई
चाईबासा में निर्माण योजनाओं की समीक्षा बैठक में उपस्थित अधिकारी

चाईबासा में पश्चिमी सिंहभूम जिले की विभिन्न निर्माण योजनाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों तक पहुंच आसान बनाने वाले पथों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। जिला समाहरणालय सभागार में हुई बैठक में कई विभागों के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति और उपयोगिता पर चर्चा की गई।

समीक्षा के दायरे में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक टाइड, अनटाइड और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट मद से स्वीकृत योजनाएं शामिल थीं। अधिकारियों ने इन योजनाओं की वर्तमान स्थिति की बिंदुवार जानकारी रखी। उपायुक्त ने कहा कि निर्माण का उद्देश्य केवल काम पूरा करना नहीं, बल्कि उससे आम लोगों को वास्तविक लाभ पहुंचाना होना चाहिए।

बैठक में विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों, पंचायत भवनों और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े संस्थानों तक सुगम आवागमन के लिए पहुंच पथ बनाने पर विशेष जोर दिया गया। नई योजना को मंजूरी देने से पहले उसकी जरूरत का उचित आकलन करने का निर्देश भी दिया गया।

निर्माण की गुणवत्ता और समयसीमा को लेकर संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारी दी गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि कार्य पूरा होने के बाद सक्षम स्तर के अधिकारी से उसकी जांच कराई जाए। स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित गुणवत्ता मानकों की पुष्टि होने पर ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़े।

पूर्ण हो चुकी योजनाओं के लिए रखरखाव की अवधि तय करने को भी कहा गया, ताकि तैयार परिसंपत्तियां लंबे समय तक उपयोगी बनी रहें। बैठक में निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों के अभियंताओं की मौजूदगी में योजनाओं की प्रगति के साथ उनके व्यावहारिक उपयोग पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार के अलावा पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, लघु सिंचाई प्रमंडल, भवन प्रमंडल, एनआरईपी, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल और ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक, सहायक तथा कनीय अभियंता उपस्थित थे। अधिकारियों को सार्वजनिक उपयोगिता, गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन को केंद्र में रखकर काम करने का निर्देश दिया गया।