पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी वन क्षेत्र में हाथियों के झुंड से धान की फसल को नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया है। खास जामदा बस्ती के किसान मोहन बिरुवा का कहना है कि सिलपूंजी गांव में उनके सात एकड़ खेत में लगी धान की फसल हाथियों ने रौंद दी। प्रभावित किसान ने वन विभाग और जिला प्रशासन से सहायता की मांग की है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इलाके में 17 हाथियों का झुंड सक्रिय है। किसान ने बताया कि धान की फसल पकने की अवस्था में थी और उन्हें अच्छी उपज मिलने की उम्मीद थी। उनका दावा है कि झुंड के खेत में प्रवेश करने से खड़ी फसल को व्यापक नुकसान हुआ और उनकी खेती में लगी मेहनत प्रभावित हुई।
बिरुवा के मुताबिक, हाथियों की गतिविधि केवल सिलपूंजी तक सीमित नहीं है। रविवार से झुंड कांतोड़िया और दिरीबुरु समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में विचरण कर रहा है। उन्होंने बताया कि हाथी रात के समय खेतों में पहुंचते हैं और खड़ी धान की फसल को पैरों से कुचल देते हैं।
रात में हाथियों की मौजूदगी के कारण किसान खेतों के पास जाने से भी डर रहे हैं। बिरुवा का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में वन विभाग को कई बार सूचना दी, लेकिन हाथियों को क्षेत्र से दूर करने के लिए अब तक कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दिया। यह दावा किसान का है; उपलब्ध विवरण में विभाग का पक्ष नहीं दिया गया है।
फसल के नुकसान से किसान ने परिवार की आजीविका पर संकट आने की बात कही है। उनके अनुसार, खेती में लगाई गई साल भर की मेहनत प्रभावित हुई है। उपलब्ध जानकारी में नुकसान का कोई आधिकारिक आकलन या वन विभाग की ओर से मुआवजे की घोषणा नहीं बताई गई है।
प्रभावित किसानों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से हाथियों के झुंड को ग्रामीण इलाकों से सुरक्षित तरीके से दूर करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने खेतों में हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने का आग्रह किया है।