पश्चिमी सिंहभूम में 75% उपस्थिति नियम में छूट की मांग, करीब 3,060 विद्यार्थियों के प्रभावित होने का दावा

बाल अधिकार सुरक्षा मंच ने उपायुक्त को आवेदन देकर दुर्गम क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक परीक्षा से जुड़े 75 प्रतिशत उपस्थिति नियम में विशेष छूट मांगी है।

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पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर क्षेत्र में बाल अधिकार सुरक्षा मंच ने मैट्रिक परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए 75 प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति के नियम में विशेष छूट देने की मांग उठाई है। मंच ने शुक्रवार को जिला उपायुक्त को आवेदन सौंपकर कहा कि मौजूदा व्यवस्था से जिले के करीब 3,060 विद्यार्थियों की परीक्षा में भागीदारी प्रभावित हो सकती है।

मंच के अनुसार, उसने जिले के 101 विद्यालयों की स्थिति का सर्वेक्षण किया है। इसी सर्वेक्षण के आधार पर दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं निर्धारित उपस्थिति पूरी नहीं कर पाए हैं। संगठन ने आशंका जताई कि कम उपस्थिति के कारण पात्र विद्यार्थियों को मैट्रिक परीक्षा का फॉर्म भरने से रोका गया तो उनकी आगे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

आवेदन में दुर्गम, वन क्षेत्र और आदिवासी बहुल इलाकों की परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है। मंच का कहना है कि कई गांवों से हाई स्कूल की दूरी 10 से 15 किलोमीटर या इससे भी अधिक है। परिवहन के सीमित साधन और बरसात में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ना विद्यार्थियों के नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने में बाधा बनता है।

संगठन ने विद्यालयों में शिक्षकों की कमी तथा पेयजल, शौचालय और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव को भी उपस्थिति कम होने के कारणों में गिनाया है। इसके साथ ही गरीबी, परिवारों का पलायन, मजदूरी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए नियम लागू करते समय स्थानीय परिस्थितियों पर विचार करने की मांग की गई है।

मंच ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के पात्र विद्यार्थियों को विशेष राहत देने का आग्रह किया है। आवेदन में 50 से 60 प्रतिशत उपस्थिति वाले बच्चों को सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से परीक्षा में शामिल करने पर विचार करने और दुर्गम इलाकों के लिए अलग उपस्थिति नीति बनाने का सुझाव भी दिया गया है।

इसके अलावा विद्यालयों की आधारभूत समस्याएं दूर करने और आठवीं कक्षा उत्तीर्ण बच्चों का अगली कक्षा में नामांकन सुनिश्चित करने की मांग रखी गई है। फिलहाल आवेदन पर जिला प्रशासन या झारखंड अधिविद्य परिषद के किसी निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है; इसलिए छूट देने का प्रश्न संबंधित अधिकारियों के विचाराधीन मांग के रूप में ही है।