पाकुड़ में कथित अवैध कोयला खनन की एसीबी जांच जारी, हाईकोर्ट में 5 नवंबर को अगली सुनवाई

पैनम कोल कंपनी से जुड़े कथित अवैध खनन मामले में एसीबी ने झारखंड हाईकोर्ट को प्रारंभिक जांच जारी रहने और अनियमितता के संकेत मिलने की जानकारी दी।

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पाकुड़ के कथित अवैध कोयला खनन मामले की सुनवाई करता झारखंड हाईकोर्ट

पाकुड़ जिले में पैनम कोल कंपनी पर लगे कथित अवैध खनन के आरोपों की एंटी करप्शन ब्यूरो की प्रारंभिक जांच जारी है। झारखंड हाईकोर्ट में मामले से संबंधित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से बताया गया कि जांच के शुरुआती चरण में अनियमितता के संकेत मिले हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित की गई है।

चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष एसीबी का पक्ष सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने रखा। उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के आधार पर प्रारंभिक जांच की जा रही है। पिछली सुनवाई में अदालत ने एसीबी को जांच सौंपते हुए 30 अक्टूबर तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान कंपनी के निदेशक ने व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने से छूट मांगी। उनकी ओर से दायर आवेदन में 71 वर्ष की उम्र का हवाला दिया गया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने इस अंतरिम आवेदन का निष्पादन कर दिया। हालांकि, कथित अवैध खनन से जुड़ी जांच की कार्यवाही जारी रहेगी।

जनहित याचिका में कहा गया है कि कंपनी को वर्ष 2015 में पाकुड़ और दुमका जिलों में कोयला खनन का पट्टा मिला था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि तय पट्टा क्षेत्र और निर्धारित सीमा से अधिक कोयला निकाला गया। इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का दावा भी किया गया है। ये आरोप अभी जांच और न्यायिक विचार के अधीन हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रकरण की पहले जांच होने के बावजूद रिपोर्ट के आधार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। कथित अतिरिक्त खनन से जुड़े राजस्व की वसूली नहीं होने की बात भी रखी गई है। याचिका में पूरे मामले की जांच कराने और संभावित राजस्व नुकसान की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।

अगली सुनवाई में एसीबी की जांच की प्रगति, स्थिति रिपोर्ट और अदालत के पिछले निर्देशों के अनुपालन पर विचार होने की संभावना है। फिलहाल प्रारंभिक जांच में संकेत मिलने की जानकारी सामने आई है; आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष या किसी पक्ष की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। आगे की स्थिति जांच रिपोर्ट और न्यायिक कार्यवाही से स्पष्ट होगी।