पोटका में ‘झारखंड प्रभा’ के 18वें अंक और चार पुस्तकों का विमोचन

हाता के माताजी आश्रम में झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद के 23वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान बहुभाषी पत्रिका, मौलिक पुस्तकों और अनुवाद कृति का लोकार्पण हुआ।

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पूर्वी सिंहभूम के पोटका प्रखंड स्थित हाता के माताजी आश्रम में महालया के अवसर पर झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद का 23वां वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में बहुभाषी साहित्यिक पत्रिका ‘झारखंड प्रभा’ के 18वें अंक के साथ चार पुस्तकों का विमोचन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर और मां सरस्वती की प्रतिकृति पर माल्यार्पण कर की। आयोजन में साहित्य, शिक्षा, कला और समाजसेवा से जुड़े लोगों के अलावा विद्यार्थी भी शामिल हुए। विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले प्रतिभागियों को समारोह के दौरान सम्मानित किया गया।

सम्मेलन में साहित्यकार विकास कुमार भकत की तीन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। इसके साथ वीरेंद्र घोष की अनुवाद पुस्तक भी जारी की गई। पत्रिका के संपादक सुनील कुमार दे ने उपस्थित लोगों को ‘झारखंड प्रभा’ की विशेषताओं और उसके प्रकाशन के उद्देश्य की जानकारी दी।

मुख्य अतिथि सूर्य सिंह बेसरा ने अपने संबोधन में परिषद की बहुभाषी पहल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पत्रिका के माध्यम से अलग-अलग भाषाओं को सम्मान देने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार, ‘झारखंड प्रभा’ भाषाई एकता का प्रतीक है और वर्तमान समय में इसकी भूमिका प्रासंगिक है।

इस अवसर पर टांगराइन मध्य विद्यालय के प्रधान शिक्षक अरविंद तिवारी, साहित्यकार करुणामय मंडल और चालियामा के तबला वादक तपन मंडल को नित्यानंद मंडल स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। सम्मान के लिए शिक्षा, साहित्य और संगीत के क्षेत्र से जुड़े तीन लोगों का चयन किया गया था।

वार्षिक सम्मेलन में पत्रिका और पुस्तकों के विमोचन के साथ स्थानीय साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को साझा मंच मिला। परिषद ने बहुभाषी रचनाओं, अनुवाद और अलग-अलग विधाओं में सक्रिय लोगों को एक आयोजन में जोड़ते हुए अपने 23वें सम्मेलन को संपन्न किया।