चतरा जिले के प्रतापपुर में रक्षाबंधन पर आपसी विश्वास और पारिवारिक आत्मीयता की एक पुरानी परंपरा फिर दिखाई दी। 70 वर्षीय शबरी खातून ने अपने मुंहबोले भाई सुरेंद्र शर्मा उर्फ जीतू बाबा की कलाई पर राखी बांधी। दोनों करीब 30 वर्षों से भाई-बहन का यह रिश्ता निभाते आ रहे हैं।
इस बार शबरी खातून की तबीयत ठीक नहीं थी। इसके बावजूद वह अपने पुत्र के साथ सुरेंद्र शर्मा के घर पहुंचीं, ताकि रक्षाबंधन की परंपरा जारी रहे। उन्होंने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनके स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की।
राखी बंधवाने के बाद सुरेंद्र शर्मा ने शबरी खातून के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और त्योहार की खुशियां साझा कीं। इस अवसर पर मौजूद लोगों के सामने दोनों के वर्षों पुराने संबंध की आत्मीयता भी नजर आई।
शबरी खातून और सुरेंद्र शर्मा का यह संबंध किसी पारिवारिक रक्त-संबंध से नहीं, बल्कि लंबे समय से कायम भरोसे और अपनत्व पर आधारित है। तीन दशकों से हर रक्षाबंधन पर राखी बांधने की परंपरा ने उनके रिश्ते को प्रतापपुर में एक अलग पहचान दी है।
इस वर्ष अस्वस्थता के बीच भी शबरी खातून का भाई के घर पहुंचना इस परंपरा के प्रति उनके जुड़ाव को दर्शाता है। वहीं, बहन से आशीर्वाद लेने और साथ मिलकर पर्व मनाने के सुरेंद्र शर्मा के भाव ने आपसी सम्मान को सामने रखा।
प्रतापपुर की यह घटना धार्मिक पहचान से अलग मानवीय रिश्तों, परस्पर सम्मान और सामाजिक सौहार्द का संदेश देती है। रक्षाबंधन के अवसर पर निभाई गई यह तीन दशक पुरानी परंपरा बताती है कि विश्वास और आत्मीयता से बने संबंध समय के साथ और मजबूत हो सकते हैं।