पलामू के प्रभात मेहता हत्याकांड की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम ने अपनी पड़ताल पूरी कर ली है। एसआईटी की रिपोर्ट में आरोपों के दायरे में आए पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की संलिप्तता का कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई है। यह रिपोर्ट सीआईडी और पलामू के डीआईजी किशोर कौशल को सौंप दी गई है।
आईपीएस अधिकारी और हुसैनाबाद के एसडीपीओ दिव्यांश शुक्ला के नेतृत्व वाली टीम ने मामले से जुड़े तकनीकी तथ्यों की जांच की। इसमें संबंधित पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन और अन्य उपलब्ध तकनीकी पहलुओं की पड़ताल शामिल थी। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
जांच के दौरान घटना के समय संबंधित पुलिसकर्मियों के अलग-अलग स्थानों पर होने की जानकारी सामने आई। एसआईटी के निष्कर्ष के मुताबिक, जांचे गए तथ्यों से हत्याकांड में उनकी भागीदारी का ठोस प्रमाण नहीं मिला। यह एसआईटी की जांच रिपोर्ट का निष्कर्ष है, जिसे अब संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखा गया है।
प्रभात मेहता पाटन थाना क्षेत्र के सहदेवा गांव से 23 मई को लापता हुए थे। चार दिन बाद, 27 मई को उनका शव बरामद किया गया था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया था। बताया गया है कि आरोपित पहले प्रभात मेहता का दोस्त भी रहा था।
मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी के बाद प्रभात मेहता के स्वजन ने कुछ पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका पर संदेह जताया था। इन्हीं सवालों की जांच के लिए पलामू पुलिस ने विशेष टीम गठित की थी। सीआईडी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी मामले की जांच रिपोर्ट मांगी थी।
एसआईटी ने स्वजन की ओर से उठाए गए आरोपों को तकनीकी सूचनाओं और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर परखा। जांच पूरी होने और रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब इसकी समीक्षा सीआईडी तथा पलामू के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के स्तर पर होगी। उपलब्ध विवरण में आगे की प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।