झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 30 साल पुराने हत्या मामले में चोपल साव को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या में उनकी संलिप्तता संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसके साथ ही हजारीबाग की निचली अदालत द्वारा 1998 में सुनाई गई उम्रकैद की सजा रद्द कर दी गई।
मामला हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र स्थित पंकरी बरवाडीह गांव का है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, दो नवंबर 1995 को झमन साव का शव उनके घर में मिला था। उनके गले पर प्लास्टिक की रस्सी का निशान पाया गया था।
घटना के बाद झमन साव के पुत्र लुकन साव के बयान पर हत्या का मामला दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में चोपल साव के साथ उनके पिता नीचा साव को भी आरोपी बनाया गया था। यह मुकदमा बाद में हजारीबाग की अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में चला।
अभियोजन का आरोप था कि घटना के पीछे जमीन से जुड़ा विवाद था। आरोप के मुताबिक, नीचा साव ने झमन साव को एक कमरे में धकेला था और उस समय चोपल साव दरवाजे पर खड़े थे। ये बातें मामले में लगाए गए आरोपों का हिस्सा थीं, जिन्हें हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर परखा।
निचली अदालत ने 1998 में चोपल साव को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने अभियोजन के साक्ष्यों और आरोपी की कथित भूमिका का मूल्यांकन करते हुए दोषसिद्धि को कायम रखने लायक आधार नहीं पाया।
अदालत के निर्णय का केंद्रीय आधार आपराधिक मुकदमे में आवश्यक प्रमाण का स्तर रहा। हाईकोर्ट के अनुसार, अभियोजन चोपल साव की संलिप्तता को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर पाया। इसी निष्कर्ष के बाद उन्हें आरोप से बरी करते हुए करीब तीन दशक पुरानी उम्रकैद की सजा समाप्त कर दी गई।