धनबाद में कतरी नदी पर कथित अवैध पुल का मामला, बीसीसीएल अधिकारियों समेत सात पर प्राथमिकी

बाघमारा में कतरी नदी के बीच कोयला परिवहन के लिए कच्चा पुल बनाने और बहाव क्षेत्र संकीर्ण करने के आरोपों पर प्रशासन ने प्राथमिकी दर्ज कर 24 घंटे में निर्माण हटाने का निर्देश दिया है।

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धनबाद के बाघमारा में कतरी नदी पर बने कच्चे पुल से संबंधित दृश्य

धनबाद जिले के बाघमारा में कतरी नदी पर कथित रूप से बिना अनुमति कच्चा पुल बनाने के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। बीसीसीएल के अधिकारियों और आरके कोल माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लोगों समेत सात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि कोयला परिवहन के लिए नदी के बीच निर्माण किया गया और उसके प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को प्रभावित किया गया। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद होगी।

प्रशासन को नदी में पुल निर्माण, किनारे पर मिट्टी और ओवरबर्डन भरने तथा जलप्रवाह का क्षेत्र संकीर्ण किए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद अंचलाधिकारी गिरिजानंद किस्कू ने मौके का भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नदी के बीच आठ स्पैन वाला कच्चा पुल मिलने की बात सामने आई।

जांच के समय मौके पर उपस्थित संबंधित लोगों से पुल के निर्माण की अनुमति और आवश्यक दस्तावेज मांगे गए। प्रशासन के मुताबिक, वे संतोषजनक कागजात उपलब्ध नहीं करा सके। निरीक्षण में नदी किनारे मिट्टी भरकर रास्ता तैयार किए जाने की स्थिति भी मिली, जिससे प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

संबंधित पक्षों को पुल 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में निर्माण नहीं हटाया गया तो उसे बलपूर्वक ध्वस्त कराया जाएगा। इस कार्रवाई में आने वाला खर्च भी संबंधित पक्षों से वसूलने की बात कही गई है। निरीक्षण और कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट उपायुक्त को भेजी जा रही है।

मामले में जल संसाधन, खनन और पर्यावरण विभाग के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी समन्वित रिपोर्ट लेने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन प्रमाणित हुआ तो प्रकरण राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष भी उठाया जा सकता है। फिलहाल यह संभावित अगली कार्रवाई है और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

प्रशासन अब यह भी पता लगाएगा कि नदी के भीतर पुल बनाने की अनुमति किसी स्तर पर दी गई थी या नहीं और निर्माण से पहले जरूरी स्वीकृतियां ली गई थीं अथवा नहीं। बीसीसीएल प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है। प्राथमिकी के बाद आगे की कार्रवाई जांच और विभागीय रिपोर्टों के आधार पर तय होगी।