फोस्टर केयर के क्रियान्वयन में पश्चिमी सिंहभूम राज्य में प्रथम, चार बच्चों को मिला पारिवारिक सहारा

मिशन वात्सल्य के तहत पश्चिमी सिंहभूम में एक बालिका और तीन बालकों को परिवार आधारित देखभाल से जोड़ा गया है। जिला प्रशासन के अनुसार फोस्टर केयर के क्रियान्वयन में जिला राज्य में पहले स्थान पर है।

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पश्चिमी सिंहभूम जिला फोस्टर केयर के क्रियान्वयन में झारखंड में प्रथम स्थान पर पहुंचा है। जिला प्रशासन की ओर से मिशन वात्सल्य के तहत चलाई जा रही इस व्यवस्था के माध्यम से परिवार से वंचित चार बच्चों को परिवार आधारित देखभाल उपलब्ध कराई गई है। इनमें एक बालिका और तीन बालक शामिल हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, योजना का उद्देश्य असहाय और अनाथ बच्चों को संस्थागत संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय सुरक्षित पारिवारिक वातावरण से जोड़ना है। चयनित बच्चों के पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवहार और सामाजिक विकास पर ध्यान देते हुए उनके पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

जिला प्रशासन का कहना है कि परिवार का सहारा खो चुके बच्चों को ऐसा परिवेश उपलब्ध कराया गया है, जहां उन्हें सुरक्षा और स्नेह के साथ स्वीकार्यता का अनुभव हो सके। फोस्टर केयर के जरिए बच्चों को परिवार का हिस्सा बनाकर उनके समग्र विकास और भविष्य निर्माण के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

उपायुक्त मनीष कुमार के अनुसार, प्रत्येक बच्चे को परिवार और सुरक्षित बचपन का अधिकार है। परिवार से वंचित बच्चे अधिक जोखिम वाली परिस्थितियों में होते हैं, इसलिए उनके लिए केवल संरक्षण पर्याप्त नहीं है। उन्हें शिक्षा, पोषण, सम्मान और स्नेह से जुड़ा पारिवारिक माहौल देना भी सामूहिक जिम्मेदारी है।

उपायुक्त ने फोस्टर केयर जैसी परिवार आधारित व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए समाज के सभी वर्गों की सहभागिता को आवश्यक बताया है। जिला प्रशासन ने जरूरतमंद बच्चों को उपयुक्त परिवारों से जोड़ने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

योजना के संचालन और बच्चों की देखभाल से जुड़ी प्रक्रिया में सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक खुशेन्द्र सोनकेशरी तथा जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पुनिता तिवारी की ओर से नियमित मार्गदर्शन दिया जा रहा है। प्रशासन के मुताबिक, चार बच्चों को मिली परिवार आधारित देखभाल जिले में मिशन वात्सल्य के क्रियान्वयन की प्रमुख उपलब्धि है।