फ्लोराइड संकट: झारखंड के सात जिलों के 283 गांव प्रभावित, हजारीबाग में संख्या सर्वाधिक

केंद्रीय फ्लोरोसिस नियंत्रण कार्यक्रम की जनवरी-मार्च 2026 की रिपोर्ट में हजारीबाग के 89 गांवों समेत सात जिलों के 283 गांवों में पानी में फ्लोराइड का उच्च स्तर दर्ज किया गया है।

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झारखंड के फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्र में पेयजल की जांच का सांकेतिक दृश्य

झारखंड के भूजल में फ्लोराइड की अधिक मात्रा कई जिलों के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ फ्लोरोसिस की जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के सात जिलों के 283 गांवों में पानी में फ्लोराइड का स्तर अधिक दर्ज किया गया। इनमें हजारीबाग के सर्वाधिक 89 गांव शामिल हैं।

रिपोर्ट में गोड्डा के 81, गढ़वा के 35, साहिबगंज के 34, रामगढ़ के 28, गिरिडीह के नौ और पलामू के सात गांव प्रभावित बताए गए हैं। राज्य के गैर-संचारी रोग कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. रवि राज के मुताबिक, झारखंड के कुल 13 जिलों में फ्लोराइड की समस्या है और इनमें सात जिलों की स्थिति अधिक गंभीर है।

स्कूलों में हुई स्वास्थ्य जांच के आंकड़े भी समस्या के असर की ओर संकेत करते हैं। रामगढ़ में 2,826 बच्चों की स्क्रीनिंग के दौरान 412 में डेंटल फ्लोरोसिस का संदेह मिला और 221 मामलों की पुष्टि हुई। गोड्डा में जांचे गए 410 बच्चों में 108 संदिग्ध और 14 पुष्ट मामले दर्ज किए गए। साहिबगंज में 54,214 बच्चों की जांच में 1,369 संदिग्ध मामले सामने आए।

हजारीबाग में 485 बच्चों की जांच के दौरान 20 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए। गढ़वा में जांचे गए 262 बच्चों में तीन और गिरिडीह में 129 बच्चों में तीन संदिग्ध मामले मिले। सामुदायिक सर्वेक्षण में भी रामगढ़ और गोड्डा में संदिग्ध तथा पुष्ट डेंटल फ्लोरोसिस के मामले दर्ज हुए। गोड्डा में चार लोगों में स्केलेटल फ्लोरोसिस का संदेह भी बताया गया है।

पानी के नमूनों की जांच में पलामू के 137 में से 89 और गढ़वा के 132 में से 44 नमूनों में फ्लोराइड एक पीपीएम से अधिक मिला। हजारीबाग में 195 में से 20, साहिबगंज में 750 में से 153, गोड्डा में 23 में से दो और गिरिडीह में 22 में से दो नमूने इस स्तर से ऊपर पाए गए। रामगढ़ में जांचे गए 174 नमूनों में कोई नमूना एक पीपीएम से अधिक नहीं मिला, हालांकि वहां 20 जलस्रोतों को अनुपयुक्त घोषित किए जाने का उल्लेख है।

प्रभावित जिलों में निगरानी के लिए जिला फ्लोरोसिस प्रकोष्ठ की व्यवस्था है, लेकिन रिपोर्ट में हजारीबाग, रांची और गिरिडीह की प्रयोगशालाओं को गैर-कार्यरत बताया गया है। रामगढ़, गोड्डा, साहिबगंज, पलामू और गढ़वा की प्रयोगशालाएं कार्यरत दर्ज हैं। आंकड़े प्रभावित क्षेत्रों में नियमित जांच, सुरक्षित पेयजल और स्वास्थ्य निगरानी की जरूरत को रेखांकित करते हैं।