रांची से संचालित होने वाली एक नई स्वास्थ्य योजना के तहत झारखंड के 746 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अबुआ दवाखाने खोले जाएंगे। इन केंद्रों पर मरीजों को एलोपैथी के साथ होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी और सिद्धा पद्धति की दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराने की तैयारी है। निर्धारित दवाओं के लिए मरीजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
राज्य सरकार ने योजना के लिए 37.25 करोड़ रुपये का एकमुश्त प्रावधान किया है। इसके अतिरिक्त सभी दवाखानों के सालाना संचालन पर 7.45 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्तावित केंद्र इंटीग्रेटेड मेडिकल स्टोर के रूप में काम करेंगे, जिससे अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की दवाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी।
स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक केंद्र के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी को एकमुश्त पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। इस राशि से जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने के साथ रैक, अलमारी, कंप्यूटर, रेफ्रिजरेटर और पावर बैकअप जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की जानी है। प्रोत्साहन राशि, इंटरनेट और रजिस्टर समेत अन्य जरूरतों के लिए हर केंद्र को एक लाख रुपये अलग से मिलेंगे।
अबुआ दवाखानों के संचालन की जिम्मेदारी पहले से नियुक्त योग प्रशिक्षकों को दी जाएगी। इसके बदले उन्हें तीन हजार रुपये प्रतिमाह पारिश्रमिक मिलेगा। सरकार द्वारा तय अनिवार्य दवाओं की आपूर्ति सिविल सर्जन और जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी के माध्यम से इन केंद्रों तक पहुंचाई जाएगी।
योजना की निगरानी के लिए प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर समितियां बनाने का प्रावधान है। जिला स्तर की समिति की अध्यक्षता उपायुक्त करेंगे। इसमें जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य सचिव और सिविल सर्जन सदस्य होंगे। प्रखंड स्तर पर समिति प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में काम करेगी, जबकि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य सचिव और सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी सदस्य रहेंगे।
राज्य स्तर पर एक प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की जाएगी, जिसमें आयुष उपनिदेशक के साथ सूचना प्रौद्योगिकी के जानकार और फार्मासिस्ट शामिल होंगे। योजना का नोडल कार्यालय आयुष निदेशालय होगा। इस बहुस्तरीय व्यवस्था के जरिये दवा आपूर्ति, केंद्रों के संचालन और उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की निगरानी की जाएगी।