पश्चिमी सिंहभूम के बंदगांव से झारखंड के सभी जिलों के अभिलेखागार और राजस्व कार्यालयों में कैथी लिपि के विशेषज्ञ नियुक्त करने की मांग उठी है। बंदगांव प्रखंड क्षेत्र संख्या-03 की जिला परिषद सदस्य बसंती पूर्ति ने इस संबंध में राज्य के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुवा को पत्र सौंपा है।
पत्र में पुराने खतियान, जमाबंदी अभिलेख और जमीन की रजिस्ट्री जैसे दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। पूर्ति का कहना है कि इनमें से कई ऐतिहासिक राजस्व रिकॉर्ड कैथी लिपि में लिखे गए हैं। इस लिपि के जानकारों की कमी के कारण संबंधित दस्तावेजों को पढ़ने और समझने में लोगों को कठिनाई हो रही है।
जिला परिषद सदस्य के अनुसार यह समस्या आम नागरिकों के साथ किसानों और रैयतों को भी प्रभावित करती है। पुराने भू-दस्तावेज समझने तथा वंशावली की स्थिति स्पष्ट करने के दौरान उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। जमीन से जुड़े विवादों में भी ऐसे अभिलेखों की जानकारी आवश्यक हो सकती है।
उन्होंने मंत्री से मांग की है कि प्रत्येक जिले के अभिलेखागार और राजस्व कार्यालय में कैथी लिपि जानने वाले विशेषज्ञ उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही कैथी में दर्ज पुराने दस्तावेजों का प्रमाणिक हिंदी अनुवाद देने की व्यवस्था बनाने का आग्रह किया गया है।
पत्र में जिला स्तर पर कैथी अनुवाद सहायता काउंटर स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। पूर्ति के मुताबिक सरकारी स्तर पर ऐसी सुविधा मिलने से रैयत अपने पुराने जमीन संबंधी कागजात को अधिक आसानी से समझ सकेंगे। उन्होंने इसे राजस्व मामलों में पारदर्शिता और सुगमता से जुड़ा विषय बताया है।
पूर्ति ने यह भी कहा है कि राज्य सरकार ने कैथी लिपि का पाठ्यक्रम उपलब्ध कराकर इसे समझने की दिशा में पहल की है, लेकिन अब इस व्यवस्था को प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी बनाने की जरूरत है। फिलहाल पत्र में रखी गई मांगों पर सरकार की ओर से किसी निर्णय या विशेषज्ञों की नियुक्ति की घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है।