बारामुड़ी खटाल संचालकों को छठ तक मोहलत, 19 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

धनबाद के बारामुड़ी में खटाल हटाने की प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच संचालकों को छठ पूजा तक राहत मिली है। अगली सुनवाई में संबंधित लोगों को जमीन के कागजात के साथ उपस्थित होने को कहा गया है।

2 मिनट पढ़ें 4 बार पढ़ी गई
धनबाद अंचल कार्यालय पहुंचे बारामुड़ी के खटाल संचालक और स्थानीय लोग

धनबाद के बारामुड़ी में खटाल हटाने की चल रही प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच संचालकों को छठ पूजा तक मोहलत दी गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को धनबाद के अंचलाधिकारी राम प्रवेश कुमार करेंगे। सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों के दस्तावेज और दलीलें देखने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

बारामुड़ी से बड़ी संख्या में लोग सोमवार को धनबाद अंचल कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने अंचलाधिकारी से छठ पूजा समाप्त होने तक समय देने का अनुरोध किया। इसके बाद अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई। प्रशासन की ओर से बारामुड़ी की जमीन खाली कराने की कार्रवाई पहले ही शुरू की जा चुकी है।

अगली सुनवाई में सभी संबंधित लोगों को जमीन से जुड़े कागजात लेकर उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। अंचलाधिकारी ने कहा है कि प्रशासन प्रत्येक संबंधित व्यक्ति को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने और पक्ष रखने का अवसर दे रहा है। इस प्रक्रिया में कागजात की वैधता महत्वपूर्ण होगी।

अंचलाधिकारी के अनुसार, जिन लोगों के पास जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं होंगे, उन्हें अतिक्रमण वाली सरकारी जमीन स्वयं खाली करनी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस कारण 19 नवंबर की सुनवाई खटाल संचालकों के लिए अहम मानी जा रही है।

खटाल संचालकों का कहना है कि वे बारामुड़ी में करीब दो दशक से अपना काम कर रहे हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उन्हें तत्कालीन उपायुक्त डॉ. बीला राजेश के कार्यकाल में वहां बसाया गया था। मौजूदा प्रशासन की खाली कराने की पहल के बाद संचालकों में नाराजगी है और वे अपने पक्ष पर विचार किए जाने की मांग कर रहे हैं।

मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। बारामुड़ी खटाल बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 4 नवंबर को सुबह 11 बजे मेमको मोड़ में कार्यक्रम निर्धारित है। इसमें पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और झारखंड सरकार के मंत्री संजय यादव के शामिल होने की जानकारी दी गई है। फिलहाल प्रशासनिक निर्णय दस्तावेजों की जांच और अगली सुनवाई पर निर्भर करेगा।