भवनाथपुर पोटाश परियोजना में छह महीने के भीतर काम शुरू होने की उम्मीद

खान एवं भूतत्व विभाग की जानकारी के अनुसार भवनाथपुर के पोटाश ब्लॉक का काम एनएसीएल को मिलने की संभावना है। परियोजना से जुड़ी वैधानिक प्रक्रियाएं अभी पूरी होनी बाकी हैं।

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गढ़वा के भवनाथपुर क्षेत्र की मुस्कैनिया पहाड़ी, जहां पोटाश खनन परियोजना प्रस्तावित है

गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड में प्रस्तावित पोटाश खनन परियोजना को लेकर गतिविधियां आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है। खान एवं भूतत्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मुस्कैनिया, गड़ेरिया डीह और बरवारी पोटाश ब्लॉक से संबंधित काम अगले छह महीने के भीतर शुरू हो सकता है। परियोजना की जिम्मेदारी एनएसीएल को मिलने की संभावना बताई गई है।

इन तीनों क्षेत्रों में फैले पोटाश ब्लॉक का कुल क्षेत्रफल लगभग 513.69 हेक्टेयर है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने यहां पहले सर्वेक्षण और ड्रिलिंग कराई थी। इसके बाद केंद्र सरकार के खान मंत्रालय ने खनिज ब्लॉक की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन शुरुआती प्रयास तकनीकी कारणों से पूरे नहीं हो सके। वर्ष 2025 में नीलामी की प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई थी।

परियोजना की मौजूदा स्थिति जानने के लिए भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व विभाग प्रभारी प्रदीप चौबे ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा था। इसमें पोटाश ब्लॉक की नीलामी, भवनाथपुर रेल लाइन और क्षेत्र में दूसरे खनिजों के उत्खनन की संभावनाओं के बारे में जानकारी मांगी गई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह पत्र झारखंड सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग को भेजा था।

विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में कहा गया है कि पोटाश ब्लॉक का काम एनएसीएल को आवंटित होने की संभावना है। विभागीय प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ी तो छह महीने में परियोजना से संबंधित गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। हालांकि, अंतिम आवंटन अथवा खनन शुरू होने की निश्चित तारीख की जानकारी सामने नहीं आई है।

भवनाथपुर में पहले सेल की खदानों और उनसे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों का स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान था। बाद में खदानें बंद होने और औद्योगिक कामकाज घटने से क्षेत्र प्रभावित हुआ। प्रस्तावित पोटाश परियोजना के कारण भवनाथपुर के साथ सिंघीताली, मकरी, बरवारी और गड़ेरिया डीह सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी उम्मीद बढ़ी है।

परियोजना आगे बढ़ने पर परिवहन, मशीनरी, निर्माण और स्थानीय कारोबार जैसी गतिविधियों के विस्तार की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल लोगों की निगाह विभागीय प्रक्रिया और संबंधित कंपनी के अगले कदम पर है। खनन कार्य आरंभ होने से पहले आवश्यक प्रक्रियाओं और वैधानिक स्वीकृतियों का पूरा होना बाकी है।