बालूमाथ में कोयला ट्रकों की धूल से नाराज ग्रामीणों ने बाजार बंद कर जताया विरोध

लातेहार के बालूमाथ में ग्रामीणों और दुकानदारों ने धूल तथा भारी वाहनों की आवाजाही के विरोध में बाजार बंद रखा। उन्होंने पानी के नियमित छिड़काव, गति नियंत्रण और परिवहन की निगरानी की मांग की।

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बालूमाथ में धूल और भारी वाहनों के विरोध में बंद बाजार का दृश्य

लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड में कोयला लदे वाहनों से उड़ने वाली धूल और भारी यातायात से परेशान ग्रामीणों तथा दुकानदारों ने शुक्रवार को बाजार बंद कर विरोध जताया। प्रमुख सड़कों के किनारे स्थित दुकानों के शटर बंद रहे और बाजार में सामान्य कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने इसे अपनी समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान दिलाने के लिए किया गया शांतिपूर्ण कदम बताया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बालूमाथ की सड़कों से दिन-रात कोयला लदे ट्रक और हाइवा गुजरते हैं। इनके आवागमन से सड़क पर जमी धूल उड़कर आसपास की दुकानों और घरों तक पहुंचती है। दुकानदारों का कहना है कि सामान पर बार-बार धूल की परत जम जाती है, जबकि खरीदारी के लिए बाजार आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने भारी वाहनों की गति को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि बाजार क्षेत्र से कुछ वाहन तेज रफ्तार में गुजरते हैं, जिससे पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ता है। लगातार आवाजाही के कारण बाजार की सड़कों पर दुर्घटना की आशंका बनी रहने की बात भी कही गई।

बंद में शामिल लोगों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विवाद पैदा करना या कोयला परिवहन रोकना नहीं है। वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें स्थानीय कारोबार और सामान्य आवागमन सुरक्षित ढंग से चलते रहें तथा परिवहन के कारण आसपास रहने वाले लोगों को लगातार धूल का सामना न करना पड़े।

प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराने की मांग रखी है। इसके साथ ही बाजार क्षेत्र में भारी वाहनों की गति नियंत्रित करने और कोयला परिवहन व्यवस्था की निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल अस्थायी उपाय के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

शुक्रवार का बाजार बंद इन्हीं मांगों पर स्थानीय लोगों और कारोबारियों की एकजुटता के रूप में सामने आया। उपलब्ध विवरण में प्रशासन की ओर से किसी निर्णय या कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई है। अब ग्रामीणों की निगाह इस बात पर रहेगी कि उनकी मांगों पर संबंधित अधिकारी क्या कदम उठाते हैं।