जमशेदपुर के बिष्टूपुर स्थित धातकीडीह हरिजन बस्ती में कल्लू घोष की हत्या के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने चार भाइयों की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। अदालत ने ज्योति मुखी, होलिया मुखी, खून मुखी उर्फ विकास मुखी और टीका मुखी उर्फ गोपी मुखी की ओर से दाखिल दोनों आपराधिक अपीलें खारिज कर दीं।
जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने उपलब्ध मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का आकलन करने के बाद निर्णय सुनाया। अदालत के अनुसार, अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं। खंडपीठ को गवाहियों में ऐसा महत्वपूर्ण विरोधाभास नहीं मिला, जिससे अभियोजन के मामले पर संदेह किया जा सके।
अभियोजन के मुताबिक, घटना 8 मई 2016 की सुबह हुई थी। कल्लू घोष सुबह करीब 6:45 बजे घर के पास पीपल के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर योगाभ्यास करने गए थे। गोली चलने की आवाज सुनकर परिजन और आसपास के लोग बाहर आए तो वह घायल मिले। उन्हें टाटा मेन हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसी दिन दोपहर करीब 2:30 बजे उनकी मृत्यु हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर गोली लगने के कई घाव दर्ज किए गए थे और दो धातु की गोलियां मिलने का उल्लेख था। चिकित्सक ने अत्यधिक रक्तस्राव और शॉक को मृत्यु का कारण बताया था। हाईकोर्ट ने इस चिकित्सकीय साक्ष्य को अभियोजन के गवाहों के विवरण के अनुरूप माना।
अपीलकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि घटना का कोई विश्वसनीय प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, प्रयुक्त हथियार बरामद नहीं हुआ और चारों की अलग-अलग भूमिका स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं की गई। राज्य सरकार और मामले के सूचक की ओर से इन तर्कों का विरोध किया गया। समग्र साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि चारों साझा उद्देश्य से अपराध में शामिल थे और गैरकानूनी जमावड़े के सदस्य के रूप में उनकी भूमिका सिद्ध होती है।
निचली अदालत ने चारों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149 और 148 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी ठहराया था। हत्या के अपराध में प्रत्येक को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के साक्ष्य-मूल्यांकन में हस्तक्षेप का कानूनी आधार नहीं पाते हुए दोषसिद्धि और दंड दोनों को कायम रखा।