बोकारो में नौ माह के बकाया वेतन को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों का प्रदर्शन, दो दिन में भुगतान का आश्वासन

आउटसोर्सिंग स्वास्थ्यकर्मियों ने बकाया वेतन और अन्य लाभों की मांग को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय के दोनों प्रवेश द्वार बंद कर दिए। सिविल सर्जन ने दो दिन के भीतर भुगतान का आश्वासन दिया है।

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बोकारो में बकाया वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन करते आउटसोर्सिंग स्वास्थ्यकर्मी

बोकारो में नौ महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए आउटसोर्सिंग स्वास्थ्यकर्मियों ने बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान कर्मियों ने कार्यालय के दोनों प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया। इससे सदर अस्पताल सहित जिले के कई अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं।

प्रदर्शनकारी कर्मियों ने लंबित वेतन के साथ टीडीएस, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और अन्य बकाया राशि के भुगतान की मांग रखी। उन्होंने परिचय पत्र और नियुक्ति पत्र जारी करने का मुद्दा भी उठाया। कर्मियों का कहना था कि लगातार काम करने के बावजूद लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उनके सामने आर्थिक कठिनाई खड़ी हो गई है।

कर्मियों के अनुसार, नियमित आमदनी रुकने से घर का खर्च और बच्चों की स्कूल फीस चुकाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ड्यूटी पर आने-जाने के लिए वाहन में ईंधन भरवाने तक में परेशानी हो रही है। दुर्गा पूजा के समय भी बकाया नहीं मिलने से उनकी चिंता और बढ़ गई है।

प्रदर्शन में शामिल कर्मियों ने दावा किया कि पहले सेवा दे चुकी राइडर कंपनी के कार्यकाल का 49 दिनों का भुगतान लंबित है। उनका यह भी कहना है कि मौजूदा जी अलर्ट कंपनी के अधीन कार्यरत करीब 700 कर्मचारियों को वेतन के साथ पीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिला है। इन दावों को लेकर कर्मियों ने शीघ्र समाधान की मांग की।

कार्यालय में तालाबंदी और प्रदर्शन के कारण अस्पतालों के कामकाज पर असर पड़ा। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के आंदोलन ने भुगतान संबंधी विवाद का प्रभाव मरीजों तक पहुंचने की स्थिति पैदा कर दी। हालांकि उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि अलग-अलग अस्पतालों में कौन-कौन सी सेवाएं और कितनी देर तक बाधित रहीं।

सिविल सर्जन डॉ. अभय भूषण प्रसाद ने बताया कि भुगतान करने तथा परिचय पत्र और नियुक्ति पत्र जारी करने पर सहमति बन गई है। उन्होंने कर्मचारियों को दो दिनों के भीतर भुगतान होने का आश्वासन दिया। अब कर्मियों की प्रमुख मांगों पर तय अवधि में कार्रवाई और अस्पतालों में सेवाओं की सामान्य बहाली पर नजर रहेगी।