बोकारो में पीएम आवास योजना पर कैग ने उठाए सवाल, 44,409 घरों में जल कनेक्शन नहीं

कैग रिपोर्ट के अनुसार, बोकारो में 2016 से 2024 के बीच बने 47,984 पीएम आवासों में से 44,409 में जल कनेक्शन नहीं मिला। लाभार्थी चयन, किस्त भुगतान और जियो-टैगिंग से जुड़े मामले भी सामने आए।

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बोकारो जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट ने कई स्तरों पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आवास निर्माण की वास्तविक स्थिति के अनुरूप किस्त जारी नहीं करने, पहले आवास पा चुके परिवार को दोबारा लाभ देने और योजना के मकानों का दूसरे उद्देश्य में इस्तेमाल करने जैसे मामले जांच में सामने आए।

कैग रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 2016 से 2024 के बीच योजना के तहत 47,984 आवास बनाए गए। इनमें 44,409 आवासों में जल कनेक्शन नहीं मिला। इसके अलावा 3,481 घरों में बिजली और 6,023 घरों में एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध नहीं पाया गया। ये आंकड़े आवासों के साथ बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता में बड़े अंतर की ओर संकेत करते हैं।

जरीडीह प्रखंड की गायछंदा पंचायत के एक मामले में लाभार्थी की पत्नी के नाम मार्च 2013 में इंदिरा आवास स्वीकृत होने का उल्लेख है। इसके बावजूद संबंधित लाभार्थी को पीएम आवास योजना-ग्रामीण के तहत जून 2018 से सितंबर 2020 के बीच 1.30 लाख रुपये की सहायता दिए जाने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।

बांधडीह साउथ पंचायत के एक अन्य प्रकरण में आवास सॉफ्ट पोर्टल पर मकान को स्वीकृति मिलने के नौ दिन बाद ही पूर्ण दिखाया गया। लाभार्थी को पहली दो किस्तों में 1.25 लाख रुपये दिए गए थे, लेकिन जांच के दौरान गांव में वह आवास नहीं मिला। रिपोर्ट के अनुसार, पोर्टल पर अपलोड स्थान-संबंधी डेटा की लोकेशन बांधडीह पंचायत कार्यालय वाली जगह पर पाई गई।

चिलगड्डा पंचायत में दो लाभार्थियों के आसपास बने आवासों का इस्तेमाल रहने के साथ निजी स्कूल चलाने के लिए भी किए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। वहीं, राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण के दौरान पूर्ण बताए गए 1,101 आवासों में से 40 का पोर्टल से मिलान किया गया। इनमें 17 आवासों के पूर्णता चरण की अनिवार्य जियो-टैग तस्वीर अपलोड नहीं मिली।

रिपोर्ट में दर्ज ये मामले लाभार्थी सत्यापन, निर्माण की निगरानी, डिजिटल अभिलेख और बुनियादी सुविधाओं के समन्वय से जुड़े हैं। उपलब्ध विवरण में संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया या आगे की कार्रवाई का उल्लेख नहीं है। ऐसे में रिपोर्ट के निष्कर्षों पर प्रशासनिक स्तर से क्या कदम उठाए जाएंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।