बोकारो स्टील प्लांट के सभी 11 गेट खुले, हाईकोर्ट ने उपायुक्त और एसपी से मांगा शपथपत्र

पूजा अवकाश के दौरान विशेष सुनवाई में बोकारो उपायुक्त ने प्लांट के सभी गेट खुलने और आवाजाही सामान्य होने की जानकारी दी। अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

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बोकारो स्टील प्लांट के गेट जाम मामले पर झारखंड हाईकोर्ट में विशेष सुनवाई

बोकारो स्टील प्लांट के गेटों पर अवरोध और कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने रविवार को पूजा अवकाश के दौरान विशेष सुनवाई की। सुनवाई में बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए।

उपायुक्त ने अदालत को बताया कि प्रदर्शनकारियों को समझाने के बाद प्लांट के सभी 11 गेट खुलवा दिए गए हैं। उनके अनुसार, कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रवेश तथा निकास सामान्य हो गया है और ड्यूटी पर आने-जाने में बाधा नहीं होने दी जाएगी। याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने भी सभी गेट खुले होने की जानकारी दी।

अदालत ने उपायुक्त के आश्वासन पर फिलहाल गृह सचिव को तलब नहीं किया। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को अदालत में दिए गए आश्वासन के संबंध में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्थानीय विधायक श्वेता सिंह और विस्थापित अप्रेंटिस संघ से जुड़े आंदोलनकारियों ने प्लांट के अधिकांश गेटों पर अवरोध उत्पन्न किया। कंपनी के मुताबिक, इससे कर्मचारियों, अधिकारियों, रखरखाव कर्मियों और आवश्यक कच्चे माल की आवाजाही प्रभावित हुई।

याचिका में कहा गया कि कंपनी ने 15 अक्टूबर को जिला प्रशासन से हस्तक्षेप मांगा था, जबकि 16 अक्टूबर की सुबह से गेटों पर अवरोध पैदा होने का आरोप है। कंपनी ने दावा किया कि प्लांट के भीतर करीब 3,500 कर्मचारी और श्रमिक फंस गए थे तथा शिफ्ट बदलने, भोजन-पानी की आपूर्ति और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता पर असर पड़ा था।

कंपनी ने अदालत के सामने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट में उत्पादन प्रक्रिया लगातार चलती है और भट्टियों, गैस पाइपलाइनों तथा अन्य संवेदनशील इकाइयों का नियमित संचालन एवं रखरखाव जरूरी है। सुनवाई के दौरान प्रशासन ने निर्बाध संचालन के लिए कदम उठाने की जानकारी दी, जबकि याचिकाकर्ता ने भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न होने की आशंका जताई। अब अदालत 28 अक्टूबर को शपथपत्रों के आधार पर मामले की आगे सुनवाई करेगी।