बोकारो स्टील प्लांट के बंद सभी 11 गेट खोल दिए गए हैं। विस्थापित अप्रेंटिस संघ के आंदोलन के कारण प्लांट में कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद सेल ने झारखंड हाईकोर्ट में आपातकालीन आपराधिक रिट याचिका दायर की थी। दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बीच मामले की विशेष सुनवाई हुई।
मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में हुई। अदालत ने बोकारो के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से स्थिति पर जवाब मांगा। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने प्लांट के सभी प्रवेश द्वार खुलवा दिए। गेट खुलने की पुष्टि सेल की ओर से पेश अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने भी अदालत के समक्ष की।
सुनवाई में ऑनलाइन जुड़े उपायुक्त अजय नाथ झा ने बताया कि सभी द्वार खोल दिए गए हैं। उन्होंने कर्मचारियों की ड्यूटी और आवाजाही में आगे बाधा नहीं आने देने का आश्वासन दिया। अदालत ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को अपने बयानों के संबंध में शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
सेल ने अदालत को बताया कि 16 अक्टूबर की सुबह से 3,500 से अधिक कर्मचारी प्लांट के भीतर फंसे थे। पाली नहीं बदल पाने के कारण कई कर्मचारियों को लगातार 36 से 48 घंटे तक काम करना पड़ा। कंपनी के मुताबिक भोजन, पानी और जरूरी दवाओं की आपूर्ति भी बाधित हुई थी। ये विवरण अदालत में सेल की ओर से रखे गए पक्ष पर आधारित हैं।
प्लांट की सुरक्षा और उत्पादन से जुड़े जोखिम का मुद्दा भी सुनवाई में उठाया गया। सेल ने 12 हजार टन पिघले इस्पात के जमने तथा संवेदनशील उपकरणों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई। स्थिति को देखते हुए चास अनुमंडल प्रशासन ने बीएसएल के मुख्य गेट के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू की है और गेटों पर पुलिस बल तैनात किया गया है।
विस्थापित अप्रेंटिस संघ ने नियोजन की मांग को लेकर 10 अक्टूबर से आमरण अनशन शुरू किया है। इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव, बोकारो के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक के साथ स्थानीय विधायक तथा संघ को प्रतिवादी बनाया गया है। फिलहाल गेट खुलने से कर्मचारियों की आवाजाही बहाल हुई है, जबकि आंदोलन और उससे जुड़े न्यायिक मामले पर अगली सुनवाई में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।