बोकारो स्टील प्लांट के बंद सभी 11 प्रवेश द्वार झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद खुलवा दिए गए हैं। विस्थापितों के आंदोलन के कारण गेट बंद होने से करीब 3,000 कर्मचारी संयंत्र परिसर में फंस गए थे। उत्पादन के साथ कच्चे और तैयार माल की ढुलाई तथा दूसरी गतिविधियां भी प्रभावित हुई थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्लांट प्रबंधन ने हाईकोर्ट में आपराधिक याचिका दायर कर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। रविवार को अवकाश के बावजूद न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने विशेष सुनवाई की। अदालत ने जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था कायम रखते हुए संयंत्र का सामान्य संचालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से अदालत को मौखिक जानकारी दी गई कि रविवार सुबह पांच बजे प्लांट का मुख्य द्वार खुलवा दिया गया था। इसके बाद सुबह 11 बजे तक शेष बंद प्रवेश द्वार भी प्रशासन ने खुलवा दिए।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से घटनाक्रम और की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण शपथ पत्र के माध्यम से पेश करने को कहा है। बोकारो के उपायुक्त को कर्मचारियों की निर्बाध आवाजाही और संयंत्र में कामकाज सुनिश्चित कराने का निर्देश भी दिया गया। प्लांट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, विस्थापित अप्रेंटिस संघ विभिन्न मांगों, विशेष रूप से नियोजन की मांग को लेकर आठ दिनों से भूख हड़ताल कर रहा था। शनिवार को आंदोलनकारियों ने मुख्य द्वार सहित प्रमुख प्रवेश मार्गों को जाम कर दिया था। इससे कर्मचारियों का प्लांट में प्रवेश और बाहर निकलना बाधित हो गया था।
अदालत के निर्देश और धारा 144 लागू होने के बाद प्रशासन ने गेट खाली कराकर स्थिति सामान्य की। मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित है। तब तक प्रशासन को कानून-व्यवस्था के साथ प्लांट का संचालन और कर्मचारियों की आवाजाही बनाए रखने के निर्देशों का पालन करना होगा।