ब्रिक्स सम्मेलन और गुजरात सचिवालय को धमकी के मामले में देवघर से एक व्यक्ति गिरफ्तार

धमकी भरे ई-मेल की जांच में गुजरात पुलिस ने देवघर के बावनबीघा से गुलशन कुमार सिंह को गिरफ्तार किया। अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे गुजरात ले जाया गया है।

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देवघर से गिरफ्तार व्यक्ति को गुजरात ले जाती पुलिस टीम

ब्रिक्स सम्मेलन और गुजरात सचिवालय को धमकी देने से जुड़े मामले की जांच में गुजरात पुलिस ने देवघर से गुलशन कुमार सिंह उर्फ गुलशन चौहान को गिरफ्तार किया है। देवघर पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करनीबाग ठाढ़ी रोड के बावनबीघा इलाके में की गई। अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद गुजरात पुलिस की टीम उसे पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई।

देवघर के एसपी प्रवीण पुष्कर ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। पुलिस के मुताबिक, दिल्ली के प्रगति मैदान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान विस्फोट और गांधीनगर स्थित गुजरात सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ई-मेल में गुलशन की ई-मेल आईडी इस्तेमाल होने की जानकारी सामने आई थी। इसी आधार पर गुजरात पुलिस की साइबर टीम देवघर पहुंची।

पुलिस इंस्पेक्टर एमबी पटेल के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय टीम ने तकनीकी जानकारी और लोकेशन के आधार पर गुलशन को उसके ससुराल से पकड़ा। उसे नगर थाना लाकर पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान उसने संबंधित ई-मेल आईडी अपनी होने की पुष्टि की। हालांकि, धमकी भेजने में उसकी वास्तविक भूमिका अभी जांच के दायरे में है।

जांच के दौरान गुजरात पुलिस ने रोशन नाम के एक युवक को भी गिरफ्तार कर पूछताछ की थी। पुलिस का कहना है कि रोशन ने धमकी से जुड़े ई-मेल के संचालन में इस्तेमाल आईडी और उसका पासवर्ड गुलशन से मिलने की बात कही है। इस दावे और गुलशन की भूमिका का सत्यापन अभी किया जा रहा है।

जांच एजेंसियां ई-मेल रिकॉर्ड, आईपी और लॉगिन विवरण के साथ मोबाइल तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डिजिटल साक्ष्य जुटा रही हैं। पुलिस के अनुसार, गुलशन मूल रूप से बिहार के जमुई जिले के दौलतपुर गांव का रहने वाला है। देवघर के नंदन पहाड़ क्षेत्र में भी उसका घर है और वह पहले सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम कर चुका है।

गुजरात पुलिस ने अदालत में दिए प्रतिवेदन में ई-मेल आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराने के आरोप, धमकी के स्रोत तथा संभावित रूप से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ की आवश्यकता बताई। डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी रिमांड के आधारों में शामिल थी। मामले में आगे की जिम्मेदारी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।