पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड में साइबर ठगी से बचाव पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हो गया। बुनियादी स्कूल जानुम्पी परिसर में हुए कार्यक्रम में प्रखंड की 12 पंचायतों से आए कार्यकर्ताओं और मध्य विद्यालयों के जीएसएमए वॉलिंटियरों ने भाग लिया। प्रशिक्षण में कुल 50 प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक उपाय बताए गए।
कार्यक्रम का आयोजन एस्पायर सामाजिक संस्था के तत्वावधान में किया गया। प्रशिक्षक ललिता गोप और महेश्वर किशन ने ऑनलाइन लर्निंग, साइबर अपराध, गेमिंग फ्रॉड तथा इंटरनेट के माध्यम से होने वाली दूसरी तरह की ठगी के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को संभावित जोखिम पहचानने और अपने क्षेत्रों में सावधानी का संदेश पहुंचाने के लिए तैयार करना था।
प्रशिक्षकों ने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग के दौरान बच्चे साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं। महिलाओं और किशोरियों को फर्जी कॉल, सोशल मीडिया तथा अन्य ऑनलाइन माध्यमों से निशाना बनाए जाने के खतरे पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों को समझाया गया कि डिजिटल सेवाओं का उपयोग करते समय अनजान व्यक्ति या संदिग्ध संदेश पर भरोसा करने से पहले सतर्कता जरूरी है।
बचाव के उपायों के तहत अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने और किसी के साथ ओटीपी साझा नहीं करने की सलाह दी गई। फर्जी लोन ऐप एवं संदिग्ध गेमिंग ऐप से दूर रहने को भी कहा गया। प्रशिक्षण में बताया गया कि संदिग्ध कॉल या संदेश मिलने पर इसकी सूचना साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दी जा सकती है।
अब प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियां चलाएंगे। वे प्रखंड के स्कूली बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई और गेमिंग से जुड़े साइबर जोखिमों के बारे में बताएंगे। इसके साथ ही किशोरियों और महिला समूहों के बीच ऑनलाइन ठगी से बचने के उपाय साझा किए जाएंगे। इस पहल का केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी को स्थानीय स्तर तक पहुंचाना है।