रांची में अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की मध्याह्न भोजन योजना के लिए राशि उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि कुकिंग कॉस्ट और प्रधानाध्यापकों के बकाये का भुगतान आठ नवंबर तक नहीं हुआ तो नौ नवंबर से राज्य के संबंधित विद्यालयों में भोजन का संचालन रोक दिया जाएगा।
संघ के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष के सात महीने बीतने के बाद भी राज्य स्तर से कुकिंग कॉस्ट की राशि नहीं मिली है। शिक्षकों का दावा है कि वित्तीय वर्ष की शुरुआत में पूरक पोषाहार मद में उपलब्ध सीमित रकम से सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के माध्यम से कुछ समय तक बच्चों को भोजन दिया गया, लेकिन मई से नियमित संचालन कठिन होता गया।
शिक्षक संगठन ने आरोप लगाया कि राशि के अभाव के बावजूद प्रधानाध्यापकों पर अपने खर्च से योजना जारी रखने का दबाव बनाया जा रहा है। संघ के मुताबिक, ऐसा नहीं करने वाले प्रधानाध्यापकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई और वेतन रोकने की चेतावनी भी दी गई। इन दावों पर विभाग का पक्ष उपलब्ध विवरण में सामने नहीं आया है।
संघ का कहना है कि कई प्रधानाध्यापक अपनी जेब से भोजन की व्यवस्था कर चुके हैं। संगठन ने दावा किया कि कुछ विद्यालयों में निजी तौर पर खर्च की गई रकम 50 हजार रुपये से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच गई है। शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि आवश्यक सरकारी राशि के बिना वे कब तक योजना का आर्थिक भार उठाते रहेंगे।
संगठन ने यह भी कहा कि मध्याह्न भोजन बंद नहीं करने के लिए अधिकारियों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी का हवाला दिया जाता है। संघ के अनुसार, बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन इसके लिए धन समय पर जारी करना भी विभाग की जिम्मेदारी है और निजी खर्च को स्थायी व्यवस्था नहीं बनाया जा सकता।
संघ ने राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक को पहले ही पत्र भेजने की जानकारी दी है। अब उसकी मांग है कि योजना संचालन की राशि तुरंत जारी की जाए और प्रधानाध्यापकों द्वारा किए गए खर्च का भुगतान तय समय तक हो। संगठन ने स्पष्ट किया है कि भुगतान नहीं होने की स्थिति में प्रस्तावित कदम नौ नवंबर से लागू किया जाएगा।