महागामा के महुआरा में 307.44 करोड़ रुपये से बन रहा 300 बेड का सुपरस्पेशलिटी अस्पताल

गोड्डा जिले के महागामा में कोल इंडिया की सीएसआर मद से सात मंजिला सुपरस्पेशलिटी अस्पताल बनाया जा रहा है। निर्माण एजेंसी ने परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

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महागामा के महुआरा में निर्माणाधीन 300 बेड का सुपरस्पेशलिटी अस्पताल

गोड्डा जिले के महागामा नगर क्षेत्र स्थित महुआरा में 300 बेड के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल का निर्माण चल रहा है। सात मंजिला अस्पताल भवन की इस परियोजना पर 307.44 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। निर्माण एजेंसी ने काम को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

अस्पताल का निर्माण कोल इंडिया की कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी सीएसआर मद से कराया जा रहा है। परियोजना की जिम्मेदारी त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के पास है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, परिसर की एक इमारत का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि अन्य भवनों में अलग-अलग स्तर पर काम जारी है।

परियोजना के तहत आधुनिक आईसीयू, ओपीडी, ऑपरेशन और जांच संबंधी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। अस्पताल में अलग-अलग विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं, मरीजों के लिए आवश्यक वार्ड और अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था प्रस्तावित है। चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आवासीय सुविधाएं भी परिसर में बनाई जा रही हैं।

अस्पताल शुरू होने के बाद गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ उपचार मिलने की उम्मीद है। अभी क्षेत्र के कई मरीजों को इलाज के लिए भागलपुर, देवघर, धनबाद या रांची जैसे शहरों की ओर जाना पड़ता है। परियोजना पूरी होने पर गोड्डा के साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों और सीमावर्ती जिलों के मरीजों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना जताई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, महागामा में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की मांग वर्ष 2012 से उठती रही है। इसी मांग ने बाद में 300 बेड वाले अस्पताल की परियोजना का रूप लिया। स्थानीय विधायक एवं राज्य की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की ओर से अस्पताल को भविष्य में चरणबद्ध तरीके से मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने के प्रयास की बात भी कही गई है।

फिलहाल परियोजना निर्माण के चरण में है और चिकित्सा सेवाएं शुरू नहीं हुई हैं। निर्माण स्थल पर भवनों के आंतरिक तथा तकनीकी कार्य आगे बढ़ाए जा रहे हैं। तय समय में काम पूरा होने और अस्पताल के संचालन में आने पर क्षेत्र में आपात तथा विशेषज्ञ उपचार की उपलब्धता बढ़ सकती है और मरीजों की दूसरे शहरों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।