रामगढ़ जिले के रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका सिद्धपीठ में शनिवार को महालया अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने मंदिर में मां के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। पितृपक्ष की समाप्ति और शारदीय नवरात्र के आगमन के बीच मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
महालया अमावस्या पितृपक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस अवसर पर लोग अपने पूर्वजों को याद करते हुए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। महालया के साथ देवी पक्ष के स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्र रविवार, 11 अक्टूबर से आरंभ हो रहा है।
दामोदर और भैरवी नदियों के संगम पर स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर में नवरात्र के नौ दिनों के दौरान पूजा-पाठ और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा। मंदिर के हवन कुंडों में साधक अनुष्ठान करेंगे। पर्व को देखते हुए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।
मंदिर के वरिष्ठ पुजारी सुबोध पंडा के अनुसार, नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। श्रद्धालु व्रत रखने और मंत्र जाप के साथ परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार मां दुर्गा का आगमन गज यानी हाथी पर माना जा रहा है।
शारदीय नवरात्र का क्रम 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू होगा। इसके बाद प्रतिदिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना होगी। 19 अक्टूबर को महानवमी और व्रत पारण निर्धारित है, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ प्रतिमा विसर्जन होगा।
नवरात्र को लेकर रामगढ़ जिले के दूसरे मंदिरों और पूजा पंडालों में भी चहल-पहल बढ़ने लगी है। आयोजक पूजा की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। शनिवार को रजरप्पा में उमड़ी भीड़ ने पर्व से पहले ही क्षेत्र के धार्मिक वातावरण को सक्रिय कर दिया।