रांची में सड़क दुर्घटना के एक मामले में मृतक के आश्रितों को मुआवजा नहीं मिलने पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की एक बस जब्त कर ली गई। शुक्रवार को मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, रांची के कुर्की आदेश के अनुपालन में सिविल कोर्ट की टीम ने यह कार्रवाई की। बस को सिविल कोर्ट परिसर में रखा गया है और भुगतान के बाद ही उसे मुक्त किया जा सकेगा।
निगम को 93,38,294 रुपये की मूल मुआवजा राशि के साथ ब्याज चुकाना है। कुल देनदारी करीब 1.15 करोड़ रुपये बताई गई है। कार्रवाई के लिए सिविल कोर्ट की टीम बीएसआरटीसी के डिपो पहुंची थी। न्यायाधिकरण ने निगम की चार बसों को जब्त करने का आदेश दिया था, लेकिन डिपो में उस समय एक ही बस उपलब्ध होने के कारण उसे कब्जे में लिया गया।
यह मामला सड़क दुर्घटना में विभूति प्रसाद सिंह की मृत्यु से संबंधित है। उनकी पत्नी मुन्नी देवी और तीन बच्चों ने वर्ष 2023 में मुआवजे के लिए वाद दायर किया था। सुनवाई के बाद एमएसीटी ने वर्ष 2024 में निगम को आश्रितों के पक्ष में 93,38,294 रुपये देने का आदेश पारित किया था।
न्यायाधिकरण ने मुआवजा राशि पर 26 मई 2023 से वास्तविक भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया था। आदेश के बावजूद भुगतान नहीं होने पर आश्रितों ने निष्पादन याचिका दाखिल कर निगम की संपत्तियों की कुर्की के माध्यम से राशि वसूलने का अनुरोध किया। इसी प्रक्रिया में बस जब्त की गई है।
बीएसआरटीसी ने इससे पहले एकपक्षीय अवार्ड वापस लेने के लिए न्यायाधिकरण में आवेदन दिया था, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद निगम ने झारखंड हाईकोर्ट में सिविल रिव्यू याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने भी 17 अप्रैल 2026 को समीक्षा याचिका खारिज करते हुए पहले के निर्णय में कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं पाई।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने और मुआवजा बकाया रहने के बाद निगम की संपत्ति पर कुर्की की कार्रवाई शुरू हुई। अदालत के आदेश के अनुसार, जब्त बस तभी छोड़ी जाएगी जब निर्धारित मुआवजा और उस पर देय ब्याज का भुगतान कर दिया जाएगा।