मुकुंदपुर में छऊ चौपाल आयोजित, युवाओं को नृत्य परंपरा से जुड़ने का आह्वान

सरायकेला के मुकुंदपुर गांव में आयोजित छऊ चौपाल में युवाओं और ग्रामीणों को इस लोकनृत्य के इतिहास, शैली और सांस्कृतिक महत्त्व की जानकारी दी गई।

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सरायकेला-खरसावां जिले के मुकुंदपुर गांव में अंतरराष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर छऊ चौपाल आयोजित की गई। रजतेंदु कला निकेतन, सरायकेला की इस पहल का उद्देश्य स्थानीय लोगों, खासकर युवाओं को सरायकेला की छऊ नृत्य परंपरा और उसकी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा शामिल हुए।

चौपाल में छऊ गुरु रजतेंदु रथ और गुरु स्वीटी पटनायक, जिन्हें कुसुमी पटनायक के नाम से भी जाना जाता है, ने इस लोककला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि छऊ की पहचान केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध लोकजीवन, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से भी है।

दोनों गुरुओं ने प्रतिभागियों को छऊ की विशिष्ट नृत्य शैली से अवगत कराया। इस दौरान नृत्य में प्रयुक्त शारीरिक मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं की भूमिका समझाई गई। साथ ही भारतीय संस्कृति में इस कला के महत्त्व और इसके अनुशासित अभ्यास पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम में ग्रामीणों और युवाओं से छऊ सीखने तथा इसकी परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील की गई। गुरुओं ने इस बात पर जोर दिया कि लोककलाओं का संरक्षण समाज की भागीदारी और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति जागरूकता से ही संभव है। उन्होंने युवाओं को संरक्षण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

आयोजकों के अनुसार, छऊ चौपाल के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर कला और संस्कृति का प्रसार करने के साथ नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया। इस पहल को गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत करने और स्थानीय समुदाय के बीच छऊ के प्रति रुचि बढ़ाने की दिशा में भी देखा गया।

इस अवसर पर नारायण पढ़िये, अवंतिका हेम्ब्रम, आशा पूर्ति, वृंदा पूर्ति, विकास, मुकेश, सिलानी और टूना पूर्ति समेत अन्य स्थानीय लोग मौजूद रहे। चौपाल में इतिहास और तकनीक की जानकारी के साथ छऊ विरासत को आगे बढ़ाने में सामुदायिक सहभागिता की जरूरत प्रमुख विषय रही।