मुरहू की 16 पंचायतों में पेयजल योजनाओं के भौतिक सत्यापन की मांग

खूंटी के मुरहू प्रखंड में अनियमित जलापूर्ति की शिकायतों के बीच उप प्रमुख ने जल जीवन मिशन की योजनाओं, पाइपलाइन, मोटर और पानी की गुणवत्ता की जांच मांगी है।

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खूंटी के मुरहू प्रखंड में पेयजल योजनाओं के सत्यापन की मांग

खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड में जल जीवन मिशन और जल-नल योजनाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठे हैं। कई गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं होने की शिकायतों के बीच प्रखंड की सभी 16 पंचायतों में योजनाओं का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है। मुरहू के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से खराब व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने का आग्रह किया है।

उप प्रमुख के अनुसार, योजनाओं का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, लेकिन प्रखंड के कई इलाकों में ग्रामीण अब भी पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि योजनाओं पर बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद अनेक गांवों में नियमित आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो सकी है। इस विषय में विभागीय पक्ष प्रकाशित विवरण में उपलब्ध नहीं है।

साबू ने जलापूर्ति प्रभावित होने के पीछे मोटर खराब होने, अनियमित बिजली और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन जैसी समस्याएं बताई हैं। उन्होंने कुछ पानी की टंकियों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्न उठाए। उनका कहना है कि कई स्थानों पर टंकियों में सुरक्षा जाली नहीं लगी है। गर्मी में नदियों और दूसरे जलस्रोतों का स्तर घटने पर ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है।

मांग की गई है कि जांच केवल कागजी अभिलेखों तक सीमित न रहे। सत्यापन के दौरान जलस्रोत, पाइपलाइन, मोटर, टंकी, बिजली की उपलब्धता और पानी की गुणवत्ता की मौके पर पड़ताल की जाए। इसके साथ यह भी देखा जाए कि योजनाओं से वास्तव में कितने घरों को नियमित पानी मिल रहा है।

उप प्रमुख ने खराब हैंडपंपों की मरम्मत को लेकर भी शिकायत की है। उनके मुताबिक, कई बार विभाग मिस्त्री उपलब्ध कराता है, लेकिन पाइप या अन्य जरूरी सामग्री का खर्च ग्रामीणों को उठाना पड़ता है। उन्होंने पिछले तीन वर्षों में प्रखंड की पेयजल योजनाओं के रखरखाव और मरम्मत के लिए मिली राशि तथा उसके उपयोग का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

साबू का कहना है कि नई योजनाएं शुरू करने के साथ पुरानी व्यवस्थाओं की मरम्मत भी जरूरी है। उन्होंने खराब मोटर और पाइपलाइन शीघ्र ठीक कराने तथा मौजूदा जलस्रोत से वंचित इलाकों में स्थायी वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की मांग रखी है। प्रशासन या संबंधित विभाग की जांच के बाद ही शिकायतों और योजनाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।