गढ़वा जिले में मेराल-भवनाथपुर-चोपन रेलखंड पर यात्री ट्रेन चलाने और रेल संपर्क के विस्तार की मांग अब गांव-पंचायत स्तर तक पहुंच गई है। सितंबर में अलग-अलग स्थानों पर हुई बैठकों के बाद छह प्रमुख संघर्ष समितियां सक्रिय हुई हैं। आंदोलन से जुड़े लोग अब ग्रामीणों को जोड़ने के लिए जनसंपर्क बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
भवनाथपुर के पहाड़ी शिव मंदिर परिसर में 16 सितंबर को हुई बैठक में मेराल-भवनाथपुर-चोपन रेल चलाओ संघर्ष समिति बनाई गई थी। इसमें प्रेम कुमार चौबे को अध्यक्ष, मनू उपाध्याय को सचिव और शौकत अली को कोषाध्यक्ष चुना गया। समिति ने मांग को जनप्रतिनिधियों और रेलवे अधिकारियों के सामने रखने तथा चरणबद्ध आंदोलन चलाने का निर्णय लिया।
इसके बाद 23 सितंबर को अरसली उत्तरी पंचायत में स्थानीय इकाई गठित की गई। आत्मानंद विश्वकर्मा को अध्यक्ष, मिथलेश प्रजापति को उपाध्यक्ष, संजय ठाकुर को सचिव और उदय गुप्ता को कोषाध्यक्ष बनाया गया। बैठक में अभियान को गांवों तक पहुंचाने और अधिक ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
खरौंधी में 19 सितंबर को हुई बैठक में उपेंद्र दास को स्थानीय रेल कमेटी का अध्यक्ष चुना गया। यहां बनी समिति ने मेराल-भवनाथपुर रेल संपर्क को खरौंधी के रास्ते चोपन तक विस्तारित करने और यात्री ट्रेन शुरू करने की मांग पर चरणबद्ध कार्यक्रम चलाने का फैसला किया। विशुनपुरा में भी आंदोलन की स्थानीय इकाई सक्रिय है।
अभियान का दायरा पड़ोसी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र तक भी पहुंचा है। सोनभद्र जिले के कोन में 20 सितंबर को हुई बैठक में मेराल-भवनाथपुर से कोन और सलईबनवा तक रेल संपर्क विकसित करने की मांग उठी। वहां गठित समिति की अध्यक्षता लक्ष्मी कुमार जायसवाल को सौंपी गई।
मझिआंव प्रखंड के दवनकरा में 21 सितंबर को हुई बैठक में आसपास के करीब दस गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में रेलवे ट्रैक के किनारे धरना, प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन और सांसद-विधायकों को ज्ञापन देने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा हुई। आने वाले दिनों में जनसंपर्क और हस्ताक्षर अभियान के बाद मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन आगे बढ़ाने की योजना है।