रामगढ़ जिले के रजरप्पा स्थित सिद्धपीठ छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर में रविवार को प्रशासन ने एक बार फिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। जेसीबी और बुलडोजर की मदद से उन दुकानों को हटाया गया, जो पहले की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद परिसर में दोबारा लगाई गई थीं। कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों ने नाराजगी जताई, लेकिन प्रशासन ने अभियान जारी रखा।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर जिला प्रशासन ने अप्रैल 2026 में मंदिर परिसर में बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया था। उस समय 254 अवैध दुकानों को हटाया गया था। कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को प्रशासन की ओर से जगह खाली करने का अल्टीमेटम भी दिया गया था।
अतिक्रमण हटाने के पीछे मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास प्रमुख उद्देश्य बताए गए थे। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा और परिसर में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात भी कही गई थी। अप्रैल की कार्रवाई के बाद हटाए गए दुकानदारों के व्यवसाय को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने हाल में अस्थायी वेंडिंग स्पेस आवंटित किया था।
इसके बावजूद मंदिर परिसर में कुछ स्थानों पर फिर से दुकानें चलने लगी थीं। इसी कारण प्रशासन ने रविवार को दोबारा कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटवाया। मौके पर दुकानों को तोड़े जाने से प्रभावित कुछ विक्रेता आक्रोशित दिखाई दिए। प्रशासन की ओर से अभियान रोकने के बजाय निर्धारित कार्रवाई पूरी की गई।
मंदिर के आसपास के गांवों से आने वाले कई परिवार फूल और प्रसाद बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। दुकानों के हटने के बाद इन परिवारों के सामने कमाई जारी रखने की कठिनाई खड़ी हुई है। अस्थायी वेंडिंग स्पेस मिलने के बावजूद दोबारा अतिक्रमण की स्थिति बनने से परिसर की व्यवस्था और दुकानदारों के पुनर्वास, दोनों का प्रश्न सामने आया है।
रविवार की कार्रवाई ने स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में पहले हटाए गए अतिक्रमण को फिर स्थापित होने देने के पक्ष में प्रशासन नहीं है। अब प्रभावित दुकानदारों के लिए आवंटित अस्थायी वेंडिंग क्षेत्र में व्यवसाय की व्यवस्था और मंदिर परिसर को अतिक्रमणमुक्त बनाए रखना प्रशासन के सामने अहम जिम्मेदारी होगी।