गढ़वा जिले के रमकंडा में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। सोमवार को जिला परिषद उपाध्यक्ष सत्यनारायण यादव और विधायक प्रतिनिधि ज्ञान रंजन पांडेय ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिर का निरीक्षण किया। इस दौरान आयुष चिकित्सक डॉ. रिजवाना फरहान सहित कई स्वास्थ्यकर्मियों के ड्यूटी से अनुपस्थित मिलने की बात सामने आई।
निरीक्षण के समय अस्पताल परिसर में ड्यूटी रोस्टर प्रदर्शित नहीं था। मौके पर मौजूद महिला चिकित्सक ने जनप्रतिनिधियों को बताया कि स्वास्थ्यकर्मी व्हाट्सएप पर उपलब्ध रोस्टर देखकर ड्यूटी पर आते हैं। इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए निरीक्षण करने पहुंचे प्रतिनिधियों ने कहा कि रोस्टर ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए, जहां मरीज और उनके परिजन भी उसे आसानी से देख सकें।
जनप्रतिनिधियों के अनुसार, सार्वजनिक रोस्टर नहीं होने से मरीजों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि किस समय किस चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी की ड्यूटी निर्धारित है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की उपस्थिति और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी रोस्टर का अस्पताल में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना जरूरी है। उनका कहना था कि सिविल सर्जन के आश्वासन के बाद भी यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है।
निरीक्षण के बाद जिला परिषद उपाध्यक्ष और विधायक प्रतिनिधि ने अनुपस्थित चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अनुपस्थित कर्मियों का वेतन रोकने की मांग भी रखी। प्रतिनिधियों ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था पर आगे भी नजर रखी जाएगी और सुधार नहीं होने पर धरना तथा अनशन किया जाएगा।
अस्पताल की खराब पड़ी एंबुलेंस का मुद्दा भी निरीक्षण के दौरान उठा। जिला परिषद उपाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने एंबुलेंस की स्थिति की जानकारी ली और उसे जल्द ठीक कराने के लिए सिविल सर्जन से आग्रह किया है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को समय पर बेहतर इलाज तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा को आवश्यक बताया।
रमकंडा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारियों की अनुपस्थिति का मामला पहले भी सामने आया था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. असजद अंसारी के पिछले निरीक्षण में भी कई स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित मिले थे। अस्पताल में दवा उपलब्ध रहने के बावजूद एक मरीज को दवा नहीं दिए जाने की शिकायत भी सामने आई थी।